चंडीगढ़. सेंट्रल यूनिवर्सिटी की मांग कर रही पंजाब यूनिवर्सिटी को यह दर्जा हासिल करने के लिए अपने संबद्ध कॉलेजों को अलग करना होगा। पीयू को या तो सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा लेना होगा या फिर अपने कॉलेजों को छोड़ना होगा। केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने साफ कहा है कि देश की तीन सेंट्रल यूनिवर्सिटी को संबद्ध कॉलेजों को अलग करना होगा। केंद्रीय मंत्री के इस निर्देश से पीयू के सामने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दर्जे के लिए संकट खड़ा हो गया है।
डेढ़ साल से प्रयास: पीयू पिछले डेढ़ साल से हर मोर्चे पर सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल करने के प्रयास कर रही है। कपिल सिब्बल और पवन कुमार बंसल से लेकर राहुल गांधी भी पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की मांग का समर्थन कर रहे हैं। पंजाब सरकार भी पिछले साल पीयू को यह दर्जा देने के लिए सहमति पत्र देकर वापस ले चुकी है। बावजूद इसके पीयू सेंट्रल यूनिवर्सिटी के दर्जे के लिए संघर्ष कर रही है। लेकिन मंगलवार को कपिल सिब्बल ने हरिसिंह गौढ़ यूनिवर्सिटी, छतीसगढ़ की गुरु घासीदास यूनिवर्सिटी और उत्तराखंड में हेमवती नंदन बहुगुणा यूनिवर्सिटी को अपने कॉलेज अलग करने को कहा है। सिब्बल का तर्क है कि सेंट्रल यूनिवर्सिटीस को विश्व स्तर का बनने के लिए संबद्ध कॉलेजों का बोझ हटाना पड़ेगा। संबद्ध कॉलेजों की वजह से यह सेंट्रल यूनिवर्सिटी मात्र परीक्षा केंद्र बनकर रह गए हैं। सिब्बल ने कहा है कि इन कॉलेजों के संचालन के लिए राज्यों में अलग से यूनिवर्सिटी बनाएं।
चंडीगढ़ और पंजाब के 178 संबद्ध कॉलेज : पीयू को अगर यह दर्जा मिलता है तो मानव संसाधन मंत्रालय के नए निर्देश के मुताबिक संबद्ध कॉलेजों को अलग करना होगा। पीयू के साथ इस समय चंडीगढ़ और पंजाब के 178 कॉलेज संबद्ध हैं। ऐसे में पीयू के सामने सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल करने से पहले इन संबद्ध कॉलेजों की स्थिति तय करनी होगी।