Career
चलें पूरब की ओर
Bhaskar News Thursday, October 15, 2009 02:16 [IST]  

careerविदेश में शिक्षा
उन्नीस वर्षीय आकाश मोदी सिंगापुर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (सिम) का छात्र है। यह पूछने पर कि उसने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा पाने के लिए पूरब की ओर रुख क्यों किया, उसका जवाब होता है, ‘मैंने बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मुंबई के प्रतिष्ठित कॉमर्स कॉलेज में दाखिले के लिए आवेदन किया, लेकिन मुझे वहां दाखिला नहीं मिला। इसके बाद मैंने अमेरिका और ब्रिटेन की यूनिवर्सिटीज में एप्लाई किया, लेकिन वहां से भी कोई जवाब नहीं आया।

मैं भारतीय शैक्षणिक वर्ष के हिसाब से पहले ही कुछ महीने की पढ़ाई मिस कर चुका था और अपना पूरा साल बर्बाद नहीं करना चाहता था, इसलिए मैंने सिम में एप्लाई किया और यहां दाखिला मिल गया।’ मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ सिंगापुर (एमडीआईएस) में अध्ययनरत सौमित चौधरी की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। आकाश और सौमित की तरह ऐसे भारतीय युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है जो अब सिंगापुर की ओर रुख कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों के दौरान सिंगापुर में कई अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों ने अपने केंद्र स्थापित किए हैं, जिनमें यूनिवर्सिटी ऑफ र्ब्िमघम, यूनिवर्सिटी ऑफ नेवाडा एंड लास वेगास प्रमुख हैं।



अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा पाना भारतीय छात्रों का हमेशा से लक्ष्य रहा है। भारतीय छात्रों में शिक्षा के लिए विदेश जाने की वजह ज्ञान की नई-नई शाखाओं में अवसरों को तलाशना और व्यक्तिगत विकास के लिहाज से वैल्यू एडिशन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत डिग्री हासिल करना और विश्वस्तरीय संस्थानों में पढ़ाई करना प्रमुख है। सौमित का कहना है, ‘सिंगापुर अंतरराष्ट्रीय कारपोरेट वल्र्ड के केंद्र में है। कई बड़ी कंपनियां अपना एशियाई मुख्यालय यहां खोल रही हैं, लिहाजा यहां रोजगार पाने की भी काफी संभावनाएं हैं।’



वर्ष 2003 में सिंगापुर में अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या 61,000 थी जो 2008 में 97,000 तक पहुंच गई। यहां सिर्फ भारत से ही नहीं, बल्कि चीन, मलेशिया, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया और वियतनाम सरीखे दूसरे एशियाई मुल्कों से भी छात्र अध्ययन के लिए आते हैं। इसके अलावा सिंगापुर को दुनिया में सबसे सुरक्षित और राजनीतिक तौर पर स्थिर देश माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों के नस्लभेदी हिंसा के शिकार होने के बाद से चिंतित माता-पिता अपने बच्चों को वहां भेजने से कतराने लगे हैं। ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों द्वारा वीजा के नियमों को सख्त करने की वजह से भी अब भारतीय छात्रों का अन्य देशों की ओर झुकाव बढ़ा है।



अंडर ग्रेजुएट/पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स
सिंगापुर के अंडरग्रेजुएट स्टडी प्रोग्राम वास्तव में बैचलर डिग्री कोर्स ही हैं। यहां साइंस, इकोनॉमिक्स से लेकर इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर और बिजनेस मैनेजमेंट जैसे विषयों में शिक्षा हासिल की जा सकती है। यहां की पब्लिक यूनिवर्सिटीज में अंडरग्रेजुएट स्टडी में दाखिले की चाह रखने वाले छात्रों को कम से कम 12 साल की औपचारिक शिक्षा पूर्ण करनी जरूरी है। बैचलर डिग्री कोर्स की अवधि तीन साल या किसी-किसी मामले में चार साल तक होती है। इसके कुछ प्रोग्राम्स में सेट स्कोर्स की जरूरत होती है, लेकिन यह हर विश्वविद्यालय के हिसाब से अलग-अलग होता है। सभी अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन होती है।



मास्टर डिग्री प्रोग्रामों को छात्रों को पेशे के हिसाब से तैयार करने के मुताबिक बनाया गया है। यह कोर्स एक या दो साल के हो सकते हैं। यहां मास्टर्स कोर्स के लिहाज से एमए, एमएस, एमबीए और एमएफए जैसी तमाम डिग्रियां हैं। यहां पीएचडी स्तर के कार्यक्रम अमूमन तीन से पांच वर्ष की समयावधि के होते हैं। पीएचडी कोर्स में वही छात्र दाखिला ले सकते हैं जिन्होंने अपनी मास्टर्स डिग्री पूर्ण कर ली हो और उन्हें जीआरई/जीएमएटी व टोफेल/आईईएलटीएस जैसे एक्जाम्स में भी उपस्थित होना होगा।



सिंगापुर में रोजगार
यहां की पब्लिक यूनिवर्सिटीज व पॉलीटेक्निक के अलावा उच्च शिक्षा से जुड़े विदेशी संस्थानों में पंजीकृत छात्र पढ़ाई का सत्र चालू रहने के दौरान हफ्ते में 16 घंटे पार्टटाइम जॉब कर सकते हैं। हालांकि छुट्टियों में वे पूर्णकालिक काम भी कर सकते हैं। निजी शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए सिंगापुर की सरकार पार्टटाइम जॉब या इंटर्नशिप करने की इजाजत नहीं देती। वैसे यहां की सरकार ने सिंगापुर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट को इसकी इजाजत दी है। यह एकमात्र प्राइवेट यूनिवर्सिटी है जो अपने छात्रों को कैंपस में 16 घंटे पार्टटाइम काम करने की इजाजत देती है। हालांकि सभी छात्रों के लिए अपना कोर्स खत्म करने के बाद सिंगापुर में और सिंगापुर के बाहर कॅरियर के लिहाज से अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

 
 


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