लुधियाना. अगर आप अपने तीन साल तक के बच्चे को साथ लेकर ट्रेन में सफर करते हैं, तो याद रखिए कि आपके पास अपने बच्चे का जन्म सर्टिफिकेट होना जरूरी है। अरे नहीं भई रेलवे ने अभी ऐसी कोई भी औपचारिकता लागू नहीं की है। फिर भी स्टेशन पर हर समय रहने वाले टिकट चेकिंग स्टाफ के लोग इस तरह की मांग यात्रियों से कर रहे हैं। लुधियाना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से बदसलूकी की सबसे ज्यादा शिकायतें चेकिंग स्टाफ की है।
हालात ये है कि चेकिंग स्टाफ की शिकायतों से शिकायत पुस्तिका भरी पड़ी है। किसी भी ट्रेन में लुधियाना स्टेशन से उतरते ही सबसे पहले यात्री का सामना चेकिंग स्टाफ यानी टिकट चेकरों की टीम से होता है। अगर, आपके साथ कोई छोटा बच्च है और उसकी उम्र कम होने के बावजूद अगर आपने उसका टिकट नहीं लिया, तो समझो खैर नहीं। बच्च साथ देखते ही चेकिंग स्टाफ के सदस्य यात्री को घेर लेते हैं। यात्री की टिकट के साथ साथ बच्चे की टिकट पूछी जाती है।
यात्री के बच्चे की उम्र कम बताने पर भी चेकिंग स्टाफ के सदस्य नहीं मानते। उनका एक ही तर्क होता है कि अगर आपके बच्चे की उम्र 3 साल से कम है, तो आप बच्चे का सर्टिफिकेट दिखाएं। अन्यथा जुर्माने के लिए तैयार रहें। यात्री की गिड़गिड़ाहट का भी उन पर कोई असर नहीं होता। वे लोग जुर्माने की बात पर ही अड़े रहते हैं। सेटिंग हो जाए, तो यात्री को छोड़ दिया जाता है। सेटिंग न होने की सूरत में यात्री के मानसिक उत्पीड़न का दौर शुरू होता है।
उसे सीधे टीसीआर कार्यालय में ले जाया जाता है और वहां पर जुर्माने के लिए कहा जाता है। वहां आसपास बाकी चैकर भी यात्री को घेर लेते हैं। उसे बार बार जुर्माना अदा करने का जोर डाला जाता है। न देने की सूरत में उसे आरपीएफ के पास पकड़ाने तक के लिए भी धमकाया जाता है। कभी कभार तो इस बात को लेकर यात्री व टिकट चेकरों की बीच झगड़े भी हो चुके हैं। इस बारे मं आला अफसरों को भी कई शिकायतें मिल चुकी हैं।
लेकिन इसके बावजूद टिकट चेकरों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है, जबकि टिकट चेकरों का कहना है कि यात्री ही जानबूझकर टिकट नहीं लेते, जुर्माना लगाने पर ही उन पर आरोप लगाए जाते हैं। उधर, इस बारे में फिरोजपुर रेल मंडल के डिवीजनल कार्मिशयल मैनेजर परमिंदर सिंह का कहना है कि टिकट चेकरों को यात्रियों के प्रति नर्म रवैया अपनाने के लिए निर्देश दिए गए हैं। यात्रियों से र्दुव्यवहार की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई की जाती है।