यह उनके श्रेष्ठतम प्रयासों में से एक है। इसी तरह ‘कम्बख्त इश्क’ की उघड़ी-उघड़ी सी करीना इस फिल्म में अपने चेहरे से भावों को अभिव्यक्त करती हैं और अब उन्हें शायद अहसास हो कि जिस्म की नुमाइश अभिनय नहीं है। उन्होंने अनाथ और शायद नाजायज संतान होने के दर्द को बखूबी प्रदर्शित किया है। प्रेम में तल्लीन मिसेज खन्ना की आंखों में आप उसके पति की व्यावसायिक असफलता के संताप को देख सकते हैं। फिल्म में यह केंद्रीय संवाद है कि तुम इतनी खूबसूरत हो कि बरबस प्यार हो जाता है। करीना का सौंदर्य दर्शक को भी मोहब्बत के लिए प्रेरित करता है। सोहेल अपनी संक्षिप्त भूमिका में विभाजित परिवार की संतप्त संतान हैं, जिसे प्रेम की तलाश है और प्रेम की विफलता को हंसते हुए सहने की हिम्मत भी है। ‘मैं और मिसेज खन्ना’ पहली फिल्म है, जिसमें आर्थिक असफलता (शेयर बाजार) प्रेम के खिलाफ दीवार बनकर खड़ी है और नायक का आत्म-सम्मान उसे झुकने नहीं देता। वह यह संजीदगी से मानता है कि आर्थिक विपन्नता आपके हृदय में उमड़ते प्यार को सोख लेती है। पैसा नहीं है तो प्यार भी नहीं है। इस विचार से कई लोग असहमत हो सकते हैं, परंतु चंद भुक्तभोगी जानते हैं कि असफलता क्या कयामत ढाती है। नए लेखक-निर्देशक प्रेम सोनी ने इस गंभीर और लीक से हटकर बनी प्रेम कहानी को हास्य के माध्यम से प्रस्तुत किया है और सारे पात्र मजबूरियों का मखौल उड़ाते से लगते हैं। यह जिंदादिली ही दर्शक को बांध सकती है। फिल्म में प्रीति जिंटा का मुजरा मनोरंजक बन पड़ा है। दीपिका पादुकोण भी संक्षिप्त अतिथि भूमिका में कमाल करती हैं। ‘मेरा नाम जोकर’ के पहले भाग में शिक्षिका सिमी ग्रेवाल के प्रति कम उम्र के छात्र को लगभग पागल होते दिखाया है। सिमी का मंगेतर डेविड (मनोज कुमार) छात्र की तड़प को समझ लेता है। वह उसे अपना पारंपरिक रकीब समझकर उसका विरोध नहीं करता, वरन उसे सहानुभूति के साथ समझाता है। इस फिल्म में भी नायक पहली मुलाकात में ही सोहेल के जुनून को समझ लेता है और उसके साथ पूरी हमदर्दी से पेश आता है। इस तरह के सारे दृश्यों का लहजा हल्का-फुल्का हास्यमय है। इस फिल्म के लिए साजिद-वाजिद ने कथा के प्रवाह के अनुरूप मधुर संगीत रचा है और पाकिस्तान की सूफी रचनाओं को भी सूझबूझ के साथ प्रस्तुत किया है। निर्देशक प्रेम सोनी ने संगीत की मदद से मूड को सही धार दी है। उच्च स्तर की तकनीकी गुणवत्ता से सजी यह पारिवारिक मनोरंजन की फिल्म है। चार सप्ताह में दो नए फिल्मकार सामने आए हैं- ‘वेक अप सिड’ के अयान मुखर्जी और ‘मैं और मिसेज खन्ना’ के प्रेम सोनी। इन युवा फिल्मकारों ने सभी तरह के अतिरेक से अपनी फिल्मों को बचाते हुए साधारण में छुपे सौंदर्य को प्रस्तुत किया है।
सितारे की लोकप्रिय छवि उसके कलाकार को सीमाबद्ध कर देती है। संजीव कुमार ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने कभी किसी भी छवि को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। कभी-कभी सितारे हमें आश्चर्यचकित कर देते हैं, मसलन नए निर्देशक प्रेम सोनी की फिल्म ‘मैं और मिसेज खन्ना’ में सलमान खान, करीना कपूर और सोहेल खान ने छवियों की जंजीरें तोड़ी हैं। ‘वांटेड’ में सलमान ने अपने तेवर और एक्शन से प्रभावित किया, परंतु ‘मैं और मिसेज खन्ना’ में सिर्फ उनकी आंखें बोलती हैं और शारीरिक हरकतों पर उन्होंने इस कदर काबू रखा है कि आपको लगता है कि उनकी स्थिरता में छिपी गति को कैसे पकड़ें।