लुधियाना. लुधियाना के सिविल अस्पताल के शौचालयों में आखिरी बार सफाई कब हुई थी। अब भविष्य में इसकी सफाई कब होगी? 16 सितंबर से पहले यहां कब फिनायल से पोंछा लगाया गया? क्या उस दिन किसी मंत्री या वीआईपी की आमद थी? यहां गंदगी की वजह से कितने मरीजों को संक्रमण हुआ?
जिला सेहत विभाग में आरटीआई से संबंधित अधिकारियों को इन सवालों ने ‘लाजवाब’ कर दिया है। वे आजकल इनका जवाब खोजने में लगे हुए हैं, जिसका रिकॉर्ड में कोई ब्यौरा ही दर्ज नहीं है। बठिंडा के एक व्यक्ति ने सूचना अधिकार में विभाग पर ऐसे सवालों की बौछार की है।
अधिकारी समझ नहीं पा रहे कि वे आखिर इसका जवाब दें भी तो क्या? सूचना के आवेदन मंे अस्पताल के कुल शौचालयों, सीटों, यूरिन पॉट, टूटियों का ब्यौरे के अलावा यहां पर आखिरी बार हुई सफाई का ब्यौरा भी पूछा है। यह भी बताने को कहा गया है कि कितने शौचालयों के बाहर मर्दाना व जनाना लिखा हुआ है।
कोई जवाब न सूझता देख फिलहाल सिविल सर्जन आफिस ने आवेदन को सिविल अस्पताल के आरटीआई विंग को फारवर्ड कर दिया है। सीएस आफिस मंे यह आवेदन आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। असल मंे सिविल अस्पताल में शौचालयों की बदतर हालत किसी से छिपी नहीं।
संभवत: किसी ने इस हालत से दुखी होकर विभाग से यह सवाल पूछे हैं। जबकि कुछ कर्मी इसे मजाकिया सवाल बता रहे हैं। उनका कहना है कि सफाई तो रोज की प्रक्रिया है, इसमें ‘आखिरी बार’ के कमेंट में मजाक छिपा है। सूचना अधिकार के तहत ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है, जब ऐसे सवालों ने अधिकारियों को पसोपेश में डाल दिया। कुछ अर्सा पहले एक सवाल ने पीजीआई चंडीगढ़ के प्रबंधन को भी दुविधा मंे डाल दिया था।
इसमें आवेदनकर्ता ने ब्यौरा मांगा था कि अस्पताल के निर्माण में कुल कितनी ईंटें लगी थी। अधिकारी आफ द रिकार्ड कहते हैं कि कई बार ऐसी सूचनाओं के लिए आवेदन आ जाते हैं, जिनमंे साफ पता होता है कि सूचना लेने वाले को शायद उसका कोई लाभ नहीं होगा। हां, उस सूचना को जुटाने में विभाग का काफी पसीना बह जाता है।
इससे पूर्व किसी ने आरटीआई एक्ट के तहत सिविल सर्जन आफिस से सूचना मांगी थी कि शहर में रोजाना कितने दूध से खोया तैयार होता है। उस खोये से कितनी मात्रा में बर्फी, मिल्क केक या अन्य मिठाइयां बनाई जाती हैं। शहर मंे दूध की रोजाना कुल कितनी खपत है। ऐसे ही एक अन्य आवेदन में पूछा गया था कि अगर सिविल अस्पताल को आग लग जाए तो मरीज या उनके परिजन जान बचाने के लिए किधर से भागेंगे।