चंडीगढ़. आर्मी जॉइन करने के सपने देखने वाली आंखें आज बॉलीवुड की चकाचौंध में खो चुकी हैं। पहाड़ी, झरने और वादियों में रहने वाला इन्सान सिल्वर स्क्रीन पर हीरो को अपनी आवाज दे रहा है।
मस्कली-मस्कली.., तुमसे ही दिन होता है.., ये दूरियां.. जैसे लेटेस्ट हिट देने वाले मोहित शुक्रवार को अपनी नई एल्बम ‘फितूर’ की प्रोमोशन के लिए शहर में थे। अपनी नई एल्बम ‘फितूर’ के बारे में मोहित कहते हैं कि इस एल्बम में हर तरह के स्टाइल के गाने हैं।
एक हिमाचली गाना भी इस एलबम में सुनने को मिलेगा। इस एल्बम के गीत मोहित 4-5 साल से लिख रहे हैं। गीत गाने से फुर्सत मिलती है, तो वह गाने लिखना शुरू कर देते हैं। वह खुद को लकी मानते हैं कि उन्हें बॉलीवुड में भी वर्सेटाइल सिंगिंग का मौका मिल रहा है। वह कहते हैं, इस एल्बम का नाम भी इसीलिए ऐसा रखा गया है, ताकि यह लोगों के सिर चढ़कर बोले। उम्मीद है ऐसा ही होगा।
सिल्क रूट से बॉलीवुड की डगर
हिमाचल के रहने वाले मोहित ने संगीत की कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं ली है। संगीत के प्रति उनकी रुचि ही उन्हें आज इस मुकाम तक ले आई है। घर का माहौल भी संगीतमय रहा है, मोहित के दादा शास्त्रीय संगीत का रियाज करते थे, तो बहन म्यूजिक में एमए कर रही हैं।
सिल्क रूट एल्बम के साथ 1998 में मोहित ने म्यूजिक में कदम रखा। इस एल्बम के गीत ‘डूबा-डूबा रहता हूं..’ को मिली सफलता ने मोहित के लिए बॉलीवुड के दरवाजे खोल दिए। बॉलीवुड में पहला ब्रेक मोहित को फिल्म ‘रोड’ से मिला। फिर शुरू हुआ प्लेबैक सिंगिंग का सफर।
मोहित कहते हैं, बीएससी करने के बाद आर्मी में जाना चाहते थे, क्योंकि आर्मी लाइफ उन्हें पसंद था। लेकिन कुछ कारणों से उनका यह सपना पूरा न हो सका। घरवालों ने खाली वक्त में मोहित को गाते-गुनगुनाते सुना तो उन्हें मुंबई जाने को कहा।
अपना एल्बम तो नो टेंशन
मोहित कहते हैं, ‘जब मैं किसी म्यूजिक डायरेक्टर के लिए गाता हूं, तो उसी के अनुसार गाना पड़ता है। म्यूजिक किसी का, गीतों के बोल किसी के और आवाज मेरी..। लेकिन अपनी एल्बम में ऐसा कोई झंझट नहीं है, सब कुछ अपने मन मुताबिक करो। खुद गीत लिखने हों तो सिर्फ थोड़ा वक्त चाहिए, फिर चाहे मैं अकेला हूं या भीड़ में।