दिवाली पर अपने कानों का रखें ख्याल
Bhaskar News Saturday, October 17, 2009 06:18 [IST]  

Crack नई दिल्ली. दीपावाली पर पटाखे जलाने से न सिर्फ लोगों के जल जाने की शिकायत आती है, बल्कि तेज धमाकों की वजह से आंखों में जलन, दम घुटने, हार्ट अटैक और कान बंद होने जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि तेज धमाके के समय अगर सावधानी न बरती जाए तो श्रवण शक्ति भी जा सकती है।



कानों को शोर से बचाएं



मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. एके अग्रवाल कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वे लोग जो लगातार 85 डेसिबल से ज्यादा शोर में रहते हैं, उनके सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। 90 डेसिबल के शोर में रहने की सीमा सिर्फ 8 घंटे होती है। 95 डेसिबल में 4 घंटे और 100 डेसिबल में दो घंटे से ज्यादा देर नहीं रहना चाहिए।



120 से 155 डेसिबल से ज्यादा तेज शोर से सुनने की शक्ति खराब हो सकती है। इसके साथ ही कानों में बहुत तेज दर्द भी हो सकता है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉ. टीएस सिद्धू कहते हैं कि 25 डेसिबल से ज्यादा शोर वाले पटाखों से 4 मीटर की दूरी बनाकर रखें। ज्यादा टार वाले बम पटाखे 125 डेसिबल से ज्यादा शोर पैदा करते हैं। ऐसे में ज्यादा शोर वाले पटाखे न जलाएं।



आस-पास ज्यादा शोर हो रहा हो, तो कानों में कॉटन या प्लग का इस्तेमाल करें। छोटे बच्चों का खास ध्यान रखें। कानों में दर्द महसूस होने पर डॉक्टर को दिखाएं।



दिल का रखें ध्यान



अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) डॉ. वीर सिंह कहते हैं कि पटाखों से निकलने वाली सल्फर डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसी टॉक्सिक गैसों और लेड जैसे तत्वों की वजह से अस्थमा और दिल के मरीजों की दिक्कतें कई गुना बढ़ जाती हैं।



ऐसी स्थिति में थोड़ी सी भी लापरवाही हार्ट अटैक या अस्थमा के अटैक की वजह बन सकती है। उनका कहना है कि इन तत्वों के कारण एलर्जी अथवा अस्थमा से पीड़ित लोगों की सांस की नली सिकुड़ जाती है। इस स्थिति में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सिजन नहीं मिल पाता, जिससे अटैक आ सकता है। ऐसे में बचाव के लिए कई दिनों तक सावधानी बरतने और दवाएं आदि नियमित रूप से लेने की जरूरत है।

 
 


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