चंडीगढ़. चंडीगढ़ के मेगाप्रोजेक्ट्स को लेकर दिल्ली तक जो शोर उठा है, वह लगभग खत्म हो गए हैं। करीब 4000 करोड़ रुपये का प्राइडएशिया प्रोजेक्ट आर्ब्रिटेशन में चला गया है। जबकि फिल्मसिटी से पाश्र्वनाथ पहले ही पीछे हट गया और अब बस यह तय होना बाकी है कि कंपनी के 47.50 करोड़ रुपये वापस किए जाएं या इसका कुछ हिस्सा जब्त किया जाना है।
ऐसी ही हालत थीम पार्क की है जहां यूनिटेक ने एक किस्त जमा कराने के बाद आगे कुछ नहीं किया। प्रशासन के एक सीनियर अफसर का कहना है कि ताजा घटनाक्रम के बाद इन प्रोजेक्ट्स के आगे बढ़ने की उम्मीद न के बराबर है।
एक तो कंपनियां ही पीछे हट गईं और दूसरा सेंट्रल विजिलेंस कमीशन और अब सीबीआई के कूदने से कोई अफसर जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं। यहां तक कि मेडिसिटी प्रोजेक्ट पर भी आगे बढ़ने से बचा जा रहा है। मॉडर्न टर्मिनल मार्केट का क्या होगा यह भी तय नहीं है।
हालांकि प्रशासन इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाना चाहता है और इसे केन्द्र सरकार की ओर से ही तैयार किया गया है, लेकिन उसी सरकार के वरिष्ठ मंत्री पवन कुमार बंसल इसका सीधा विरोध कर रहे हैं। केंद्र का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से किसानों को बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी जबकि बंसल पहले ही कह चुके हैं कि चंडीगढ़ में ऐसा प्रोजेक्ट आने से यहां ट्रैफिक की परेशानी बढ़ जाएगी। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के ट्रक यहां आएंगे और शहर में भीड़ बढ़ेगी।
विकास पर पड़ेगा असर
करीब तीन साल पहले इन सभी प्रोजेक्टस को चंडीगढ़ के विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया जाता था। यह कहा जाता था कि तीनों प्रोजेक्ट्स से चंडीगढ़ में करीब 6 हजार करोड़ रुपये का निवेश होगा और इससे 30 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। शहर को एक बड़े आर्थिक केन्द्र के तौर पर विकसित करने का सपना भी इन्हीं प्रोजेक्ट्स की बदौलत देखा गया था। अब हालत यह है कि बीते साल भर से सभी मेगा प्रोजेक्ट्स पर एक के बाद एक कई सवाल उठाए जा रहे हैं और शहर में एक भी नया बड़ा प्रोजेक्ट नहीं आया, न ही इन पर काम आगे बढ़ा।
रोड्रिग्स को नहीं बुलाया दिल्ली
चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनुपम गुप्ता ने कहा है कि मेगा प्रोजेक्ट्स को लेकर सेंट्रल विजिलेंस कमीशन की जांच रिपोर्ट न तो प्रशासन को भेजी गई और न ही इस जांच के नतीजे के बारे में कुछ बताया गया है। उन्होंने यह भी कहा है कि सीवीसी या होम मिनिस्ट्री की ऑडिट रिपोर्ट के बारे में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक जनरल एस. एफ. रोड्रिग्स से किसी स्तर पर कोई बात ही नहीं की गई।
ऐसे में यह कहना गलत है कि रोड्रिग्स को प्रधानमंत्री कार्यालय ने तलब किया। एक टीवी चैनल की ओर से इस तरह की खबर प्रसारित की गई थी कि मेगा प्रोजेक्ट्स में गड़बड़ी के चलते प्रधानमंत्री ने रोड्रिग्स को दिल्ली तलब किया था और उनसे इस्तीफा देने के लिए कहा गया था।
गुप्ता ने रोड्रिग्स की ओर से चैनल को भेजे गए कानूनी नोटिस में कहा है कि रोड्रिग्स से न तो कोई जवाबतलबी की गई है और न ही सीवीसी या होम मिनिस्ट्री की रिपोर्ट के आधार पर या इससे संबंधित किसी स्तर पर कोई बात हुई है। जब कभी ऐसी रिपोर्ट तैयार होती है तो वह प्रशासन को भेजी जाती है, जबकि इस मामले में अभी ऐसा नहीं हुआ। प्रशासन को ऑडिट रिपोर्ट का जो ड्राफ्ट मिला है उसका जवाब दिया जा रहा है।