Ludhiana
मुख्यमंत्री की जान की नहीं परवाह!
विपन जंड Tuesday, October 20, 2009 03:48 [IST]  

ludhianaलुधियाना. पंजाब में एविएशन डिपार्टमेंट की ‘कैजुअल एप्रोच’ मुख्यमंत्री को महंगी पड़ सकती थी। जिस विमान में मुख्यमंत्री ने 30 अक्टूबर 2008 को उड़ान भरनी थी, उसके पायलट अनुभवहीन थे।

वीआईपी उड़ान से एक दिन पहले 29 अक्टूबर को विमान साहनेवाल मे टेस्ट फ्लाइट के दौरान क्रैश हो गया था। इसमें दोनों पायलटों की मौत हो गई थी। डीजीसीए की जांच में खुलासा हुआ है कि एक पायलट विमान के सिस्टम से वाकिफ नहीं था जबकि दूसरे के पास उसे उड़ाने का अनुभव ही फर्जी था।

बचाव मे एविएशन डिपार्टमेंट ने डीजीसीए को तर्क दिया कि सीएम की फ्लाइट पर इन दोनों पायलटों ने नहीं बल्कि किसी अन्य को जाना था। इस दावे पर डिपार्टमेंट जांच कमेटी को कोई सबूत नहीं दे सका। रिपोर्ट आने के बाद एविएशन डिपार्टमंेट में हड़कंप है। एविएशन हलकों में चर्चा है कि पायलट को किंग एयर सी 90 उड़ाने का लाइसेंस डीजीसीए ने जारी किया था। पंजाब सरकार ने उसके लाइसेंस पर विश्वास कर पायलट को भर्ती किया था।

29 अक्टूबर 2008 को क्रैश पंजाब सरकार के विमान किंग एयर सी 90 की एक साल की मैराथन इंक्वायरी डीजीसीए ने पूरी कर ली है। जांच में यह बात समाने आई कि हादसे वाले दिन लैंडिंग से पहले बनी आपात स्थिति से निपटने में पायलटों की अनुभवहीनता आड़े आई। पहली बार फ्लाइट लेकर लुधियाना आए पायलट एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र व हवाई अड़चनों से वाकिफ नहीं थे। वे जीपीएस के सहारे ही रनवे को लोकेट कर रहे थे।

पायलटों ने लैंडिंग का पहला प्रयास विफल होने के बाद 48 सौ मीटर के पूरे रनवे पर उड़ान भरकर पर्याप्त ऊंचाई पर जाने की बजाय चार सौ फुट से ही विमान मोड़ लिया। राउंड लेते वक्त 40 फीट के दो कम्युनिकेशन टावर अड़चन पैदा करने लगे। इसकी दहशत मंे पायलट विमान पर नियंत्रण खो बैठे। क्रैश से पहले कॉकपिट मंे धुएं की बात भी सामने आई है लेकिन इसकी वजह स्पष्ट नहीं हो सकी।

पायलट की फेमिलीयराइजेशन फ्लाइट का दावा झूठा

नियम मुताबिक जिस पायलट ने चार एयरक्राफ्ट उड़ा लिए हों, उसे ओपन लाइसेंस मिल जाता है, फिर वह किसी भी विमान को उड़ा सकता है। शर्त यह है कि उसे पहले विमान के सिस्टम से वाकिफ होने के लिए वरिष्ठ पायलट की मौजूदगी में फेमिलीयराइजेशन फ्लाइट (परिचय उड़ान) भरनी होती है।

इंदिरा गांधी उड़ान अकादमी रायबरेली में तो डमी कॉकपिट में यह ट्रेनिंग दी जाती है। पायलटों के पास ऐसी ट्रेनिंग ही नहीं थी। अहम तथ्य यह है कि पंजाब सरकार ने डीजीसीए के समक्ष दावा किया कि पायलट ने हरियाणा सरकार के एग्जीक्यूटिव पायलट कैप्टन नंदा के साथ परिचय उड़ान की थी जबकि कैप्टन नंदा ने डीजीसीए के समक्ष इस दावे को सिरे से नकार दिया।

क्यों कर दी जल्दबाजी?

असल में वीआईपी फ्लाइट के लिए पायलट के पास पचास घंटे का अनुभव जरूरी है। डीजीसीए ने हैरानी जताई है कि अनुभव न होने पर व कम विजिबिलिटी मंे भी एविएशन मैनेजमंेट ने उन्हें लुधियाना जाने की इजाजत क्यों दी? रिपोर्ट के मुताबिक मैनेजमेंट पायलट की आईआर (इंस्टूमंेट रेटिंग चेक) की औपचारिकता पूरी करने की जल्दबाजी में था, ताकि उसे वीआईपी फ्लाइंग के लिए भेजा जा सके। भर्ती के वक्त पायलटों के उड़ान अनुभव रिकार्ड जांचे नहीं गए।

दोनों पायलटों के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम नहीं बनाया गया। आपरेशन मैन्यूल, स्टैंडर्ड आपरेशन प्रोसीजर के बारे में जानकारी व डिफेक्ट रजिस्टर भी तैयार नहीं किया। उधर, इस बार एविएशन डिपार्टमंेट के निदेशक गगन बराड़ ने कहा कि उनके पास अभी आधिकारिक तौर पर रिपोर्ट नहीं पहुंची है। जांच रिपोर्ट मिलते ही उसका अध्ययन कर अगली कार्रवाई की जाएगी और डीजीसीए को भी जवाब तैयार कर भेजा जाएगा।

सहायक पायलट के अनुभव का दस्तावेज नहीं

सहायक पायलट के पास फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (एफएए) का लाइसेंस था, जिसमें सिर्फ बीई 1900 (एसआईसी) व बीई 1900 (एसआईआरसी) उड़ाने का जिक्र था। देश की एक प्रमुख विमान कंपनी को कटघरे में खड़ा करते हुए डीजीसीए ने कहा है कि उक्त कंपनी ने सहायक पायलट को 100 घंटे सी 90 उड़ाने का अनुभव सर्टिफिकेट दे दिया। इसी सर्टीफिकेट के आधार पर डीजीसीए ने पायलट के इंडियन लाइसेंस में सी 90 दर्ज कर दिया। जांच में कंपनी अनुभव को साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सकी।



 
 


अपने विचार यहां लिखें:
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: