चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) में प्राइवेट परीक्षा देने वाली दो छात्राओं के अंक बढ़ाने के खुलासे से परीक्षा शाखा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा हो गया है। यह गड़बड़ी बीए द्वितीय वर्ष के प्रश्नपत्रों के पुनमरूल्यांकन (री—वैल्यूएशन) के दौरान की गई। अक्टूबर के पहले हफ्ते हुए इस खुलासे के बाद भी आरोपी क्लर्क गुरचरण सिंह मल्ली का बाल तक बांका नहीं हुआ। इस घटना से होनहार विद्यार्थी सकते में हैं। पीयू में पहचान अथवा प्रलोभन देकर अंक बढ़ाने की चर्चा पहले भी होती रही है।
डीएमसी में भी बढ़ाए अंक
अप्रैल में रिजल्ट आने के बाद इन छात्राओं ने पुनमरूल्यांकन के लिए फॉर्म भरा था। पुनमरूल्यांकन होने के बाद इनकी उत्तरपुस्तिकाएं सितंबर के आखिर में परीक्षा शाखा पहुंचा दी गईं। यहीं यह खेल हुआ। दिहाड़ीदार क्लर्क मल्ली ने बेखौफ होकर एक छात्रा के अंग्रेजी और दूसरी के राजनीति विज्ञान में अंक बढ़ाकर उन्हें उत्तीर्ण दिखा दिया। यह भेद कभी खुल न सके, इसके लिए ‘गोपनीय’ समझी जाने वाली मेन रिकॉर्ड शीट में भी यही अंक दर्ज कर दिए गए। इतना ही नहीं इस क्लर्क ने दोनों छात्राओं की डिटेल मार्कशीट (डीएमसी) में भी अंक बढ़ा दिए।
इस तरह उठा पर्दा
इसके बाद द्वितीय वर्ष के पुनर्मूल्याकंन का काम देख रहे अन्य कर्मचारियों ने टीचरों द्वारा दिए गए अंक, रिकॉर्ड शीट और डीमएसी की जांच की तब इसका खुलासा हुआ। इसके बाद रिकॉर्ड शीट में अंक दर्ज करने और डीएमसी तैयार करने वाले का पता लगाया तो यह करतूत इस क्लर्क की पाई गई। परीक्षा शाखा ने इसकी जानकारी रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक को दी है।
पुलिस को नहीं दी सूचना
पीयू प्रशासन ने अभी तक इसकी सूचना पुलिस को नहीं दी है। परीक्षा शाखा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। पुलिस यह खुलासा कर सकती है कि क्लर्क ने किस प्रलोभन में आकर ऐसा किया।
क्यों नहीं हो रही कार्रवाई
सितंबर में पुनमरूल्यांकन के दौरान गलत कोडिंग की वजह से छात्र नेता के अंक बढ़ने पर (प्राप्तांक 53 हो गया था) प्रशासन ने तीन कर्मचारियों का सस्पेंड कर दिया था। लेकिन इस प्रकरण में आरोपी क्लर्क के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। नियमानुसार आरोपी को सस्पेंड करके जांच शुरू होती है। लेकिन इस क्लर्क का परीक्षा शाखा (द्वितीय वर्ष) से तबादला भर किया गया है। कहा जा रहा है कि यहां के दिहाड़ीदार कर्मचारियों के कई रसूखदारों से अच्छे संबंध हैं। कहीं इस प्रकरण को इन्हीं रसूखदारों की पहुंच की वजह से तो दबाने की कोशिश नहीं की जा रही।
परीक्षा शाखा ने पूरा प्रकरण मेरे पास भेजा है। इसके बाद पीयू प्रशासन को पूरा रिकॉर्ड भेज दिया गया है। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी की जाएगी। इसके बाद ही पुलिस में मामला दिया जाएगा। - प्रो. एके भंडारी, परीक्षा नियंत्रक, पीयू