चंडीगढ़. वहां बाईसाइकिल थी, यहां स्टूडेंट्स के पास बाइक्स हैं। वहां स्कूल में यूनीफॉर्म नहीं थी, यहां है। वहां स्मार्ट बोर्ड है, तो यहां ब्लैक बोर्ड। यह कहना है साउथ अफ्रीका से आई कर्टनी का। कर्टनी के साथ ही चार और विदेशी विद्यार्थी एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत शुक्रवार को शहर पहुंचे।
यह पांचों विवेक स्कूल में क्लास में शामिल होंगे और उनकी यह पढ़ाई दिसंबर तक चलेगी। यह जिन देशों से आए हैं, वहां का खाना-पीना, रहन-सहन, आबो-हवा सब अलग है। चंडीगढ़ में ये बच्चे जानेंगे यही चीजें भारत में कैसी हैं। यह बच्चे किसी होटल या गेस्टहाउस में नहीं बल्कि स्कूल के ही विद्यार्थियों के घरों पर ठहरे हैं।
शुरू हुई पढ़ाई
यह सभी सोमवार को स्कूल पहुंचे। जर्मनी से आए एलिअस विटेनस्टीन ने 11वीं, साउथ अफ्रीका से आई केयलिन ओक्स ने 12वीं और कर्टनी अगेनीज ने 11वीं, ऑस्ट्रेलिया से आए विल एलेट ने 10वीं और थॉम्स यीट्स ने विवेक स्कूल की 11वीं क्लास अटेंड की। अपने अनुभव साझा करते हुए केयलिन कहती हैं, ‘वहां संबंधित सब्जेक्ट की टीचर अपने क्लासरूम में ही रहती हैं, स्टूडेंट्स को उनके पास जाना होता है।
वहां टीचर के क्लास में आने पर उन्हें विश तो करते हैं, लेकिन खड़े होने की जरूरत नहीं होती।’ कर्टनी कहती हैं, ‘यूनिफॉर्म पहनकर स्कूल जाना अच्छा लग रहा है। यहां कई स्टूडेंट्स कार या बाइक से स्कूल आते हैं, वहां साइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर भरोसा करते हैं।’