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सांस्कृतिक बदलाव में निहित है विकास
एन रघुरामन Wednesday, October 21, 2009 00:20 [IST]  

हम ऐसे अधिसंख्य लोगों को जानते हैं जिनके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस होता है, इसके बावजूद वे वाहन नहीं चला पाते।



इसी तरह कार चलाने वाले अधिसंख्य चालक नहीं जानते हैं कि जेब्रा क्रॉसिंग पर कार रोकना या बगैर संकेत दिए व्यस्त मार्गो पर लेन बदलना ट्रैफिक नियमों के मुताबिक अपराध की श्रेणी में आता है।



वाहन चलाने के इन बुरे तौर-तरीकों के दिन लदने वाले हैं, बशर्ते मारुति उद्योग लिमिटेड सरीखी कंपनियां अपनी योजना को मूर्तरूप दे सकें। पिछले दिनों मुंबई में मारुति ने गुणवत्ता प्रधान वाहन चलाने का प्रशिक्षण प्रदान करने वाले सिम्युलेटर ऐडेड क्वालिटी ट्रेनिंग के रूप में ड्राइविंग स्कूलों की पहली श्रंखला शुरू की।



इस योजना के तहत स्थानीय आरटीओ ऑफिस लाइसेंस के इच्छुक लोगों के ड्राइविंग टेस्ट लिए जाने की तब तक संस्तुति नहीं कर सकेगा, जब तक कि आवेदक मारुति के ड्राइविंग स्कूल के निर्धारित मानदंड पूरे नहीं कर लेता।



सच तो यह है कि मारुति से प्रेरणा लेते हुए टाटा मोटर्स और ह्युंडई भी निकट भविष्य में अपने-अपने ड्राइविंग स्कूल खोलने की योजना पर काम कर रहे हैं। जाहिर सी बात है कि इससे वाहन चालकों की दक्षता में निश्चित तौर पर सुधार आएगा।



फिलहाल जो ड्राइविंग स्कूल देश भर में अस्तित्व में हैं, उनमें से अधिसंख्य को अंतरराष्ट्रीय ड्राइविंग स्तर की जानकारी तक नहीं है। वे किसी किस्म का कोई पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं कराते। और तो और इन निजी ड्राइविंग स्कूलों के अधिसंख्य प्रशिक्षक यातायात संबंधी नियमों से स्वयं अनजान रहते हैं।



यही एक प्रमुख वजह है कि तमाम भारतीय इसी कारण अमेरिका, यूरोप या खाड़ी देशों में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने में असफल रहते हैं, क्योंकि उन्हें सुरक्षित ड्राइविंग से जुड़ी मूलभूत बातें या नियम पता ही नहीं होते।



एक कड़वी सच्चई यह है कि अधिसंख्य वाहन चालकों में पैदल यात्रियों के लिए कोई सम्मान नहीं होता। ऐसे में इन स्कूलों में पहला सबक यही सिखाया जाता है कि प्रत्येक वाहन चालक कहीं न कहीं स्वयं पैदल यात्री है।



जाहिर सी बात है कि आप कार चलाते हुए बेडरूम में तो नहीं जा सकते हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो जहां तक ड्राइविंग की बात है, यह एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव होगा।



मारुति ने प्रत्येक किलोमीटर पर एक मेंटेनेंस शॉप खोली है और अब देश में पहली ऐसी कार निर्माता कंपनी बन कर उभरी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के अनुरूप वाहन चालकों को प्रशिक्षण देने के लिए स्कूल खोले हैं।

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