लुधियाना. पंजाब सरकार के वीआईपी विमान किंग एयर सी 90 के क्रैश होने से पहले कॉकपिट में पैदा धुएं ने जांच एजेंसियों के लिए बड़ी उलझन पैदा कर दी। याद रहे घटना 29 अक्टूबर 2008 को हुई थी। डायरेक्टर जनरल सिविल एविएशन (डीजीसीए) की जांच रिपोर्ट में उल्लेख है कि कॉकपिट मंे धुआं था, जो विमान के क्रैश होने के कारणों में से एक था।
अब सवाल यह उठ रहा है कि ये धुआं पैदा कहां से हुआ? यह राज शायद राज ही रह जाए क्योंकि काफी हाथ-पैर मारने के बावजूद भी डीजीसीए धुआं कहां से आएगा, पता नहीं लगा सकी। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार विमान को आग गिरने के बाद लगी। जब विमान गिरा तो उसके कई टुकड़े हो गए थे।
आग गिरने के बाद लगी तो असमंजस यही है कि कॉकपिट में धुंआ कहां से आया। जब विमान उड़ा, रूटीन जांच में कोई नुक्स नहीं पाया गया था हो सकता है कि उड़ान के दौरान ही कोई खराबी हुई हो। मृतक पायलटों के पोस्टमार्टम के दौरान उनके फेफड़ों में कार्बन पार्टिकल व सीरस फ्लयूड मिला।
इसी सूत्र से जांच टीम को क्रैश से पहले विमान के कॉकपिट मंे धुंए का शक हुआ। पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर डीएमस (सीए) से टिप्पणी ली गई। उन्होंने भी जांच टीम के शक को वाजिब बताया, जिसके बाद इस पहलू से जांच शुरू हो गई।
लुधियाना सिविल अस्पताल में दोनों शवों का पोस्टमार्टम करने वाली तीन सदस्यीय टीम का हिस्सा रहे डा. बलविंदर कुमार बताते हैं कि मृतकों के फेफड़े सिकुड़े हुए थे। तकनीकी तौर पर जब भी धुंआ शरीर के भीतर जाता है, तो सीरस फ्लयूड पैदा करता है। दोनों ही शवों मंे यह फ्लयूड मिला।
इसी आधार पर निष्कर्ष निकाला गया कि मौत से पहले सांस से धुआं उनके शरीर में गया था। कॉकपिट में धुंआ पैदा कैसे हुआ, इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए डीजीसीए सी 90 विमान बनाने वाली अमेरिकन कंपनी से मदद मांगी। कंपनी से 90 सीरिज के विमानों के कॉकपिट मंे धुंए की घटनाओं का ब्यौरा मांगा।
कंपनी ने डीजीसीए को जनवरी 1994 से फरवरी 2008 के दौरान घटित 13 हादसों का ब्यौरा भेजा। इनका अध्ययन करने पर पाया गया कि कॉकपिट अमूमन वेंट ब्लोअर ही धुआं पैदा होने की वजह बने। इस पर जांच टीम ने लैंडिंग गियर मोटर, फ्लैप मोटर व वेंट ब्लोअर मोटर का निरीक्षण किया लेकिन इसमें कोई सुराग नहीं मिल पाया।
बैटरी को चेक कराने पर उसमें कोई डिस्चार्ज या नुक्स नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि 28 जनवरी 2005 को भी कॉकपिट के फ्यूल कंट्रोल पैनल से जलने की बदबू व आवाज आनी शुरू हो गई थी। हालांकि 29 अक्तूबर 2008 को उड़ान से पहले विमान की रूटीन जांच में कोई नुक्स नहीं पाया गया। धुंए की वजह उड़ान के दौरान ही पैदा हुई। बहरहाल, डीजीसीए की फाइनल जांच रिपोर्ट में कॉकपिट में धुंए का राज खुल नहीं सका। हादसे के वक्त विमान मंे 1133 किलोग्राम ईंधन था।