Chandigarh
तो फिर लेनी होगी 12 वीं की कोचिंग भी
Bhaskar News Wednesday, October 21, 2009 07:10 [IST]  

चंडीगढ़. आईआईटी की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में अगले वर्ष से12वीं में न्यूनतम 60 फीसदी अंक की पात्रता को 80 फीसदी किए जाने पर सरकार विचार कर रही है लेकिन चंडीगढ़ में ज्यादातर विद्यार्थियों के मुताबिक ऐसा किया जाना फायदेमंद नहीं होगा। विद्यार्थी ही नहीं कोचिंग सेंटर के संचालकों का भी कहना है कि अगर ऐसा हुआ तो विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव और बढ़ जाएगा। हालांकि विद्यार्थियों का ऐसा वर्ग भी है जो इसे 80 फीसदी करने के हक में है।



सब्जेक्टिव और ऑब्जेक्टिव का नहीं है मेल



विशेषज्ञों के मुताबिक 12वीं की परीक्षा सब्जेक्टिव जबकि आईआईटी की परीक्षा ऑब्जेक्टिव होती है। सब्जेक्टिव में ज्यादा अंक मिलने की उम्मीद कम रहती है जबकि ऑब्जेक्टिव में ऐसा नहीं होता। अगर मार्क्‍स को 80 फीसदी किया गया तो विद्यार्थियों का सारा ध्यान 12वीं की परीक्षा की ओर ही रहेगा। ऐसे में आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में पिछड़ने की आशंका ज्यादा रहेगी।



होगी पैसे की बर्बादी



प्रवेश परीक्षा में हिस्स लेने के लिए करीब एक हजार रुपए आवेदन पत्र पर खर्च होते हैं। ये आवेदन पत्र 12वीं की परीक्षा से काफी समय पहले ही जमा किए जाते हैं। 11 अप्रैल 2010 को होने वाली प्रवेश परीक्षा के लिए 1 नवंबर से 7 दिसंबर तक आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा करवाने होंगे। आवेदन पत्र की मूल कॉपी (हार्ड कॉपी) को 19 दिसंबर तक आईआईटी में जमा कराया जा सकता है।



ऐसे में विद्यार्थी नहीं जानते कि उसके 80 फीसदी अंक आ भी सकेंगे या नहीं लेकिन आवेदन पत्र उसे जमा करवाना ही होगा। 80 फीसदी से चूक गए तो आवेदन पत्र पर खर्च किया गया पैसा बर्बाद ही होगा। शहर से करीब तीन हजार जबकि देशभर से करीब चार लाख विद्यार्थी इस परीक्षा में हर साल बैठते हैं।



शुरू हो जाएगी 12वीं की कोचिंग



सेक्टर 24 में स्थित एक कोचिंग इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर संगीता खन्ना ने बताया कि 80 फीसदी नहीं होना चाहिए वरना विद्यार्थियों पर बोझ बढ़ेगा। राज्यों के कई बोर्डो का सिलेबस सीबीएसई से आसान है और वहां खुल कर अंक दिए जाते हैं। ऐसे में सीबीएसई के विद्यार्थियों के लिए समस्याएं बढ़ेंगी।



सेक्टर 36 के एक इंस्टीट्यूट की डायरेक्टर अनु शर्मा ने बताया कि एक तरफ तो 10वीं में दबाव खत्म करने के लिए ग्रेडिंग सिस्टम लागू किया जा रहा है। दूसरी ओर 12वीं बोर्ड को 80 फीसदी के साथ और मुश्किल बनाना ठीक नहीं है। अगर ऐसा हुआ तो विद्यार्थी हमसे 12वीं की कोचिंग भी लेनी शुरू कर देंगे।



अगर 80 फीसदी हुआ तो हम पर मानसिक दबाव बढ़ेगा। मेरे हिसाब से 60 फीसदी ही बेहतर है। किसी भी बदलाव की आवश्यकता नहीं है। - महक



आईआईटी और सीबीएसई 12वीं, दोनों की तैयारी अलग—अलग करनी होती है। 80 फीसदी हुआ तो हमारे लिए समस्याएं बढ़ जाएंगी। - देव



12वीं में सब्जेक्टिव व आईआईटी में ऑब्जेक्टिव पेपर आता है। सब्जेक्टिव में इंटेलिजेंसी नहीं देखी जाती और लिखावट के भी अंक कट जाते हैं। 60 फीसदी ही ठीक है। - रजत शर्मा

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