दो नवंबर को हेमा मालिनी अपनी बेटी ऐशा देओल और पति धर्मेद्र के साथ स्वयं की निर्माण संस्था में ‘टेल मी ओ खुदा’ नामक फिल्म प्रारंभ करने जा रही हैं। 1981 के बाद धर्मेद्र-हेमा की जोड़ी, जिसने दर्जनों सफल फिल्मों में काम किया, पुन: प्रस्तुत हो रही है।
इस फिल्म में वे प्रेमी नहीं वरन पति-पत्नी की भूमिका में नजर आएंगे और ऐशा उनकी बेटी की केंद्रीय भूमिका में हैं। अमिताभ बच्चन ने काम करने से इनकार कर दिया इसलिए पति की भूमिका के लिए हेमा मालिनी के पास धर्मेद्र के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
धर्मेद्र लंबे समय तक अपने सितारा पुत्रों के पिता की भूमिका भी अस्वीकार करते रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपनी नायक छवि से बेइंतेहा प्यार रहा है। सुनील दत्त भी मुन्नाभाई के पहले तक दर्जनों फिल्मों में अपने बेटे के पिता की भूमिका अस्वीकार करते रहे।
सुपर सितारे यथार्थ को अनदेखा करके अपनी नायक छवि से गहरा मोह रखते हैं। सेवानिवृत्त होने के बरसों बाद तक शिखर दौर में उनके लिए बजाई गई तालियों की अनुगूंज को अपने हृदय की घाटियों में सुनते रहते हैं। राजेश खन्ना को अभी तक ‘आराधना’ के दिनों का भ्रम है।
‘टेल मी ओ खुदा’ के साथ एक और मुद्दा जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि धर्मेद्र और उनकी पहली पत्नी प्रकाश के अनेक रिश्तेदार आज भी मन ही मन उनके और हेमा मालिनी के विवाह को अस्वीकार करते हैं।
वष्रो तक सनी और बॉबी ने अपने पिता की ‘स्पूतनिक फैमिली’ से कोई संबंध नहीं रखा। सुना है कि विगत कुछ वर्षो से सनी उनसे मिलने-जुलने लगे हैं। आज तक धर्मेद्र के घर में ऐसा कोई उत्सव नहीं हुआ जिसमें स्पूतनिक परिवार निमंत्रित था और हेमा के हवन-पूजन में भी कोई शामिल नहीं था।
अब एक फिल्म में ही सही, परंतु धर्मेद्र हेमा के पति और ऐशा के पिता के रूप में नजर आएंगे। ऐशा के लिए सार्वजनिक स्वीकृति का यह क्षण कितना भावनात्मक होगा! घर में वे अपने पार्ट टाइम पिता से हमेशा प्यार पाती रही हैं, परंतु सार्वजनिक स्वीकृति, भले ही वह परदे पर है, की बात ही अलग है।
हेमा जी ने कुंआरे जीतेंद्र और संजीव कुमार पर शादीशुदा धर्मेद्र को जब तरजीह दी, तब वह सत्रह-अठारह की लड़की नहीं थीं वरन दर्जनों फिल्में करने वाली वयस्क दुनियादार महिला थीं और दूसरी पत्नी होने के संताप से पूरी तरह परिचित थीं।
धर्मेद्र के प्रति इतना गहरा प्यार था कि उन्होंने मुश्किल कदम उठा ही लिया। अपनी बेटियों का पालन पोषण भी उन्होंने उन्हें विश्वास में लेकर बड़े वयस्क और स्वस्थ ढंग से किया। वे जितनी अच्छी अभिनेत्री हैं, उससे बेहतर मां सिद्ध हुई हैं।
धर्मेद्र हमेशा ही आशिक मिजाज रहे हैं, परंतु हेमा के प्यार ने उन्हें पागल सा कर दिया था और उनसे शादी उनके लिए जीवन-मरण का सवाल बन गई थी।
यह संभव है कि अपने इस बहुप्रचारित प्रेम प्रकरण में दूर कहीं उनके मन में इस तरह का भाव आया हो कि अगर यह ट्रॉफी नहीं मिली तो उनके समकालीन सितारे क्या सोचेंगे?
कभी-कभी न चाहते हुए भी प्रेम प्रतिस्पर्धा हो जाता है और मामला सामाजिक सम्मान का हो जाता है। हृदय के दूरदराज कोने में दबे इस भाव को स्वीकार करना आसान नहीं होता।
सुना है कि हेमा जी की यह फिल्म हॉलीवुड की ‘मामामिया’ से प्रेरित है और लड़की का पिता कौन-यह ‘मामामिया’ का केंद्रीय विचार है। इस फिल्म में ऋषि कपूर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
धर्मेद्र और उनका परिवार पारंपरिक मूल्यों को मानने वाले लोग हैं और उन्हें केवल सुविधाजनक आधुनिकता ही पसंद है। बहरहाल ‘टेल मी ओ खुदा’ मजेदार फिल्म हो सकती है और ऐशा के लिए आखिरी अवसर कि उन्हें माता-पिता की पतवार के सहारे बॉक्स ऑफिस का भव सागर पार करना है।