लुधियाना. ‘ठोकर खाकर भी न संभले वो मुसाफिर का नसीब, हक तो अदा करते हैं राह के पत्थर अपना’। अब अगर आप मेडिकल स्टडीज को नजरअंदाज कर कैरियर के चक्कर में गृहस्थी पूरी करने में देरी करते रहें तो यह आपकी मर्जी। वरना डाक्टरों की तो दो टूक सलाह है कि तीस की उम्र से पहले ब्याह कर घर में चिराग रोशन हो जाना चाहिए।
डाक्टरों के मुताबिक जिन युवतियों का ब्याह कैरियर के चक्कर में टाला जाता है या जो युवतियां ब्याह के बाद गर्भधारण मंे देरी करती हैं, उन्हें फिर ‘लेट थर्टीज’ में गर्भधारण में काफी दिक्कतें आती हैं। शहर में गायनाकोलोजिस्ट के पास अब पहली डिलीवरी के ज्यादातर केस 25 से 32 साल की उम्र के बीच आते हैं। गायनाकोलोजिस्ट का कहना है कि गर्भधारण की उचित उम्र 23 से 27 साल के दौरान है। डिग्री कोर्सो के दौर में 90 के दशक के बाद डिलीवरी के ज्यादातर केस 25 से 30 साल के बीच आते थे। अब प्रोफेशनल कोर्सो के दौर ने मातृत्व की औसत उम्र 27 से 32 साल कर दी है।
डा.रमा सोफ्त अस्पताल के गायनाकोलोजिस्ट डा.अमित सोफ्त कहते हैं कि पहली डिलीवरी के लिए आने वाली 100 महिलाओं मंे से 60 फीसदी की उम्र 26 साल से ऊपर होती है। डा.सोफ्त के मुताबिक शादी से पहले सेटल हो जाने के चक्कर में ब्याह को देर तक टाला जाता है। तीस के बाद शादी करने वाली महिलाओं में कंसेप्शन रेट काफी कम होता है। ऐसे 25 से 30 फीसदी दंपतियों को इनफर्टीलिटी ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है। उनके मुताबिक 23 से 27 साल की उम्र में नार्मल डिलीवरी ज्यादा होती है। ज्यादा उम्र में बच्चेदानी का मुंह पूरी तरह से नहीं खुल पाता, जिससे सिजेरियन की आशंका बढ़ती है। इसके अलावा लेट थर्टीज में गर्भधारण से कई दिक्कतें जुड़ी हैं, जिनमंे गर्भपात, प्री टर्म लेबर पेन, ब्लड प्रेशर बढ़ना प्रमुख हैं।
जीटीबी अस्पताल की गायनाकोलोजिस्ट डा.विनीता मुंजाल के मुताबिक 33 साल की उम्र के बाद पहली डिलीवरी में डाउन सिंड्राम बेबी पैदा होने का खतरा रहता है। बच्चे के मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। पहला बेबी 21 से 30 साल के बीच हो जाना चाहिए, उसके बाद बांझपन की समस्या भी आ सकती है।