लुधियाना. तृणमूल कांग्रेस की नेता और रेल मंत्री ममता बनर्जी देश के संघीय ढांचे के लिए बहुत बड़ा खतरा हैं। वे कोलकाता में बैठकर समानांतर सरकार चला रही हैं। वे केंद्र की कैबिनेट की बैठकों में भी भाग नहीं लेतीं, जिससे प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की स्थिति हास्यास्पद बन गई है। ये विचार बुधवार को यहां होटल ली बैरन में भारतीय साम्यवादी दल (सीपीआई) के राष्ट्रीय महासचिव एबी बर्धन ने एक संवाददाता सम्मेलन में व्यक्त किए। वे मोगा में पार्टी के एक नेता की बरसी पर जाने से पहले लुधियाना रुके थे।
पंजाब की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब राज्य बिजली बोर्ड को तोड़ा नहीं जाना चाहिए। दो- तीन वर्षो से पंजाब राज्य बिजली बोर्ड बहुत अच्छा काम कर रहा है। पंजाब में बिजली संकट के लिए बोर्ड जिम्मेदार नहीं है, बल्कि राज्य सरकारें जिम्मेदार हैं। जिन्होंने एक भी यूनिट बिजली पैदा करने की कोशिश नहीं की। वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता ने देश में बढ़ रही जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसके लिए केंद्र सरकार की गलत नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दालों, खाद्य तेलों व अन्य आवश्यक वस्तुओं के सट्टा बाजार को बंद करने की मांग की। साथ ही कहा कि इनसे बेतहाशा मूल्य वृद्धि हुई है।
एबी बर्धन ने धान का न्यूनत्तम समर्थन मूल्य भी 1000 रुपये प्रति क्विंटल का विरोध करते हुए इसे कि सानों से नाइंसाफी बताया। उन्होंने कहा कि धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में वाजिब मूल्य वृद्धि होनी चाहिए। देश में 40 फीसदी सूखा और बाकी जगह बाढ़ आई है, जिससे काफी नुकसान हुआ है। साम्यवादी नेता ने डीजल व पैट्रोल की कीमतें कम करने की मांग भी केंद्र सरकार से की। उन्होंने कहा कि पेट्रोल व डीजल की कीमतों में वृद्धि से आवश्यक वस्तुएं महंगी होती हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि बांट प्रणाली (राशन डिपो) से सभी वर्गो को बराबर सम्मान मिलना चाहिए। बर्धन ने एक सवाल के जवाब में कहा कि यूपीए सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के फैसले पर साम्यवादी दलों को कोई अफसोस नहीं है। उन्होंने कहा कि यह गलत समय पर गलत मुद्दे पर समर्थन वापसी का फैसला था। उनके मुताबिक किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या और बढ़ रही कीमतों पर उन्हें समर्थन वापसी का फैसला लिया जाना चाहिए था। राहुल गांधी को मिल रहे जनसमर्थन को नकारते हुए उन्होंने कहा कि यह सब मीडिया द्वारा किया गया प्रचार है।
कपिल सिब्बल द्वारा आईआईटी से संबंधित दिए बयान पर उन्होंने कहा कि यह गलत है, इससे गरीबों के बच्चें प्रभावित होंगे और अमीरों को दाखिला लेना आसान हो जाएगा। वर्धन ने राज्य में ट्रेड यूनियन के अधिकारों में की जा रही कटौती पर गहरी चिंता प्रकट की। उन्होंने कहा कि उनके नोटिस में लाया गया है कि पंजाब में ट्रेड यूनियन की रजिस्ट्रेशन नहीं हो रही है। अरुणाचल प्रदेश को भारत का अखंड हिस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने चीन के साथ सभी मुद्दों पर बातचीत से हल करने पर जोर दिया और कहा कि केंद्र सरकार इस बारे में ठीक कर रही है। इस मौके पर उनके साथ जिला महासचिव डा. अरुण मित्रा भी मौजूद थे।