किचन घर की धुरी होता है। घर की महिलाएं यहां अपना सबसे अधिक समय व्यतीत करती हैं और यहीं पर बना भोजन घर के सदस्यों की सेहत का राज होता है। वास्तु के अनुसार घर न बना होने के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इनमें सबसे ज्यादा परेशानी तो तब आती है जब किचन भी वास्तु के अनुरूप न बना हो। यदि आपके किचन में भी कोई वास्तुदोष है या आप अपने किचन को वास्तु के अनुसार सजाना चाहती हैं तो आइए जानते हैं पंडित हेमचंद्र पांडेय द्वारा दिए गए वास्तुशास्त्र पर आधारित कुछ आसान टिप्स-
किचन हमेशा घर के आग्नेय कोण (दक्षिण पूर्व) में ही होना चाहिए।
किचन का निकासी द्वार उत्तर-पश्चिम में हो।
सीढ़ी के नीचे कभी भी किचन न बनाएं।
किचन से पानी की निकासी दक्षिण-पश्चिम में हो, उत्तर-पूर्व में कभी न हो ।
घर के अन्य कमरों से किचन का फर्श थोड़ा ऊंचा हो।
खाना बनाते समय मुख पूर्व की ओर हो।
किचन के भीतर कोई भी पिलर न हो, साथ ही कोई शीशा भी न लगाएं।
किचन बनाते समय इस बात का ध्यान रखना भी आवश्यक है कि यह चौकोर अथवा वर्गाकार हो परंतु किसी भी स्थिति में गोलाकार न हो।
फर्श और दीवार का रंग यदि पीला हो तो सर्वोत्तम है। इसके साथ ही नारंगी, चॉकलेटी और लाल रंग भी किया जा सकता है। लेकिन काला, सफेद और नीला रंग कभी न करें।
गैस का बर्नर कभी भी मुख्य द्वार के सामने न रखें।
अनाज, मसालों एवं दाल से भरे डिब्बे दक्षिण पूर्व में ही रखें।
जहां तक संभव हो किचन में फ्रिज न रखें और अगर ऐसा करना पड़े तो फ्रिज दक्षिण-पूर्व में रखें, लेकिन उत्तर पूर्व में कभी न रखें।
यदि किचन की पश्चिमी दीवार पर गेरू रंग हो तो बहुत अच्छा रहेगा।
किचन का हवादार होना बेहद जरूरी है। इनके साथ किचन के अन्य दोषों को भी दूर करना हो तो किचन के ऊपर पानी की टंकी रखवा दें तो किचन के ज्यादातर वास्तुदोष दूर हो जाएंगे।