Raipur
झगड़े में अटकी सैकड़ों फाइलें
नगर संवाददाता Friday, October 23, 2009 03:02 [IST]  

रायपुर. कमिश्नर और महापौर की लड़ाई में नगर निगम में सारा कामकाज ठप पड़ा है। विवाद और तबादला आदेश के बाद से आयुक्त अमित कटारिया पिछले एक हफ्ते से दफ्तर नहीं आ रहे। यही हाल महापौर का है। इन दोनों की अनुपस्थिति से अफसर और कर्मचारियों की मौज हो गई है।



लोग परेशान घूम रहे हैं। निगम हेड आफिस के साथ ही साथ सभी जोनों में नए काम बंद हैं। कई भाजपा पार्षदों का आरोप है कि निगम के अधिकारी विकास कार्र्यो से जुड़ी 400 से अधिक फाइलें अपने घर लेकर चले गए हैं। अटके भुगतान की वजह से ठेकेदारों ने काम करना बंद कर दिया है। आयुक्त के रूप में नियुक्त ओमप्रकाश चौधरी के आने का इंतजार किया जा रहा है। फाइलों का मूवमेंट बंद होने और सक्षम अधिकारी के अभाव में निगम में न तो नए टेंडर हो रहे हैं और न ही ठेकेदारों के चेक काटे जा रहे हैं। दिसंबर में नगरीय निकाय चुनाव होने की संभावना के मद्देनजर पार्षदों को अपने वार्डे की चिंता सता रही है।



उनका कहना है कि आखिर समय में महापौर व कमिश्नर के झगड़े ने पिछले कई महीनों की हमारी मेहनत पर लगभग पानी फेर दिया है। मतदाता आखिर समय में किए गए कार्य को देख कर ही निकाय चुनाव में वोट डालता है। किसी भी जोन में न तो नया काम हो रहा है और न ही पुराने काम की मरम्मत की जा रही है। पार्षदों को वार्डे में सड़क और नाली की मरम्मत की चिंता सबसे अधिक सता रही है। इसके कारण भाजपा पार्षद बेहद नाराज चल रहे हैं। अफसरों के द्वारा घर में फाइलें ले जाने की शिकायत अब वे पार्टी हाईकमान में करने की सोच रहे हैं।



दो महीने पहले राशन कार्ड बनाने का काम जोनों में शिफ्ट किया गया था, लेकिन न तो राशन कार्ड जोन में बन रहे हैं और न ही हेड आफिस में। फाइलों के ठप पड़े मूवमेंट पर जब अफसरों से बात करने की कोशिश की गई तो वे कुछ भी कहने से बचते रहे। बताते हैं कि एक आला अफसर ने गत 15 अक्टूबर को जारी एक आदेश में जोन कमिश्नर को यह हिदायत दे रखी है कि जोनों में बिना उनकी अनुमति के कोई नया काम शुरू न किया जाए। उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। महापौर और पूर्व कमिश्नर अमित कटारिया के बीच एमआईसी में नए ठेकों पर फंड जारी करने की बात को लेकर विवाद हुआ था। दीपावली के पहले ठेकेदारों को पेमेंट देने के महापौर के निर्देश के बावजूद आयुक्त ने पैसा जारी नहीं किया था। आयुक्त का कहना था कि निगम की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। 30 करोड़ की देनेदारी है। ऐसी स्थिति में ठेकेदारों का पेमेंट कैसे किया जाए।

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