रायपुर. आंबेडकर अस्पताल के फार्मासिस्टों से उनके पद और योग्यतानुसार काम न लेकर लिपिकीय कार्य कराया जा रहा है। जबकि फार्मासिस्टों का काम बाबुओं से लिया जा रहा है। यह आरोप छत्तीसगढ़ फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी गुर्देकर ने लगाया है।
उन्होंने बताया कि आंबेडकर अस्पताल में 12 फार्मासिस्ट हैं। इनमें से केवल तीन को ही औषधि से संबंधित कार्य सौंपा गया है, बाकी नौ फार्मासिस्टों से मरीजों का पंजीयन, पास वितरण इत्यादि लिपिकीय कार्य कराया जा रहा है। औषधि भंडार और क्रय शाखा का प्रभार लिपिकीय कर्मचारियों को दे दिया गया है। चूंकि लिपिक को दवाइयों का ज्ञान नहीं होता। इससे अस्पताल में हमेशा जीवन रक्षक दवाइयों का अभाव बना रहता है और अक्सर विकट स्थिति निर्मित होती रहती है। इस अव्यवस्था का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। पद और योग्यतानुसार काम नहीं लिए जाने से व्यथित फार्मासिस्टों में नाराजगी है।
अश्वनी ने बताया कि नियमानुसार, औषधि भंडार के स्टोरकीपर और क्रय शाखा का कार्य केवल पंजीकृत फार्मासिस्टों से ही कराया जा सकता है। यदि ऐसे कर्मचारी उपलब्ध न हो, तो वरिष्ठ कंपाउंडरों से कार्य लिया जाना चाहिए। लिपिकीय वर्ग कर्मचारी से स्टोरकीपर और औषधि क्रय का कार्य नहीं लिया जा सकता। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने सभी अस्पताल अधीक्षकों को इस आशय का आदेश जारी कर कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है। इसके बावजूद आंबेडकर अस्पताल में उच्चधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि फार्मेसी अधिनियम, 1948 के तहत डाक्टर की पर्ची पर केवल रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट ही दवाई वितरण कर सकता है। अन्य किसी के द्वारा वितरण करने पर एक हजार रुपए जुर्माना या छह माह का कारावास अथवा दोनों सजा एक साथ हो सकती है।