चंडीगढ़. 55वें नेशनल स्कूल गेम्स का आगाÊा वीरवार को सेक्टर 7 स्थित स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स में हुआ। नगर प्रशासक एसएफ रोड्रिग्स ने इसका उद्घाटन किया। 27 अक्टूबर तक चलने वाले इन खेलोंे के पहले ही दिन रंग बिरंगे गुब्बारे हवा में उड़ाए गए और खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट किया। इस मौके पर ‘चक दे इंडिया’ गाने पर विद्यार्थियों के डांस ने सभी का मन मोह लिया।
रोड्रिग्स ने कहा कि इन खेलों के माध्यम से सभी खिलाड़ियों को एक साझा मंच मिलता है ताकि वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें। इन खेलों के लिए शहर में तीन हजार खिलाड़ी, 400 अधिकारी और 25 राज्यों की टीमें हिस्सा ले रही हैं। शहर के करीब 200 खिलाड़ी इनमें हिस्सा ले रहे हैं।
पहले ही दिन चंडीगढ़ की टीम ने भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया। इन आयोजनों में कुछ समस्याएं भी खिलाड़ियों व कोचेज को आईं। कहीं जिम्नास्टिक के आउटडोर होने से प्रदर्शन पर समस्या तो कहीं कूपन के अनिवार्य होने की दिक्कत। डॉजबॉल के खेल दोपहर करीब 45 मिनट देरी से शुरू हुए।
कमरे बदलने की मांग की थी: नेशनल स्कूल गेम्स में भाग लेने आए विद्यार्थियों ने चंडीगढ़ में उनके ठहरने के लिए किए गए इंतजाम पर संतोष व्यक्त किया है। आंध्रप्रदेश से आए छात्र धर्मेद्र और लखन के मुताबिक डीएवी स्कूल में उन्हें ठहरने के लिए कमरे देने में कोई देरी नहीं हुई। उन्होंने ही कमरे बदलने की मांग की थी। इस वजह से दूसरा कमरा मिलने के लिए उन्हें 10 मिनट का इंतजार करना पड़ा। छात्रों से साथ आए पेरेंट्स शिव कुमार और मधू ने भी ठहरने के इंतजाम पर संतोष व्यक्त किया है।
खिलाड़ी बोले, पड़ा प्रदर्शन पर असर
खिलाड़ी दिनेश के मुताबिक आउटडोर गेम्स होने से उसकी एकाग्रता नहीं बनी और प्रदर्शन पर असर पड़ा। दर्शक आस पास ही खड़े होकर देख रहे थे। कुलविंदर ने बताया कि जिम्नास्टिक में तो ‘डबल फ्लेक्स फ्लोर’ का इस्तेमाल ही होता है पर इन खेलोंे में ऐसा नहीं किया गया। फ्लोर पर पैर जम न सका इसलिए प्रदर्शन पर असर पड़ा।
कोच नीरू ने कहा कि जब पता लगा कि शहर में जिम्नास्टिक के खेल आउटडोर होंगे तो ऐसा लगा कि हम 40 साल पीछे चले गए हों। जब हम विद्यार्थी होते थे तब इनडोर हॉल में ही खेल होते थे। कोच शत्रुघन सिंह ने बताया कि उन्हें खाने के कूपन नहीं चाहिए। दोपहर के खाने के लिए स्टेडियम से स्कूल और फिर वापस स्टेडियम आना पड़ता है।
स्कूल में खाना मिलने से समय बर्बाद होता है। हम चाहते थे कि हमें कूपन न दिए जाएं और खिलाड़ियों को स्टेडियम के पास खाना मिले।