पटियाला. शाही शहर के अर्बन एस्टेट फेज 1, 2 और 3 में अगर कोई भी प्राईवेट मोबाइल कंपनी किसी भी जगह अवैध तरीके से अपना टावर लगाना चाहती है तो आपका स्वागत है। क्योंकि यहां ना आपको रोकने वाला कोई नहीं है। यहां की पंजाब अर्बन डिवेलपमेंट अथार्टी (पुडा) पिछले सात सालों से इतनी गहरी नींद में सो रही है कि उसे इसका कोई इल्म ही नहीं है कि उसके इलाके में कौन सी कंपनी आकर कितने मोबाइल टावर लगा चुकी है। यहीं हद नहीं पुडा को अगर इस संबंध में लोगों ने जगाया तो पुडा ने मोबाइल कंपनियों को कुछ कहने की बजाय उल्टा लोगों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।
क्या है मामला: असल में सूचना अधिकार मंच ने आरटीआई के तहत पुडा से जानकारी मांगी थी कि पुडा उन्हें बताए कि साल 2003 से लेकर 2009 तक अर्बन एस्टेट के सभी फेजों में कुल कितने मोबाइल टावर लगे हैं? उनमें से कितने पुडा की इजाजत से लगे हैं? जो टावर इजाजत से नहीं लगे उनके खिलाफ पुडा ने क्या कार्रवाई की है? कितने टावरों को गिराया जा चुका है? उन पर पुडा का कितना पैसा खर्च आया है? यह आरटीआई 14 अगस्त 2009 को डाली गई थी। पुडा ने मंच को 14 सिंतबर को जवाब भेजा कि आपकी जानकारी के बाद इस संबंध में सर्वे किया जा रहा है, इसलिए थोड़ा समय लगेगा, जल्द ही जवाब भेजा जाएगा।
अब जवाब देखिए: पुडा ने 8 अक्तूबर को अपने जवाब में जो लिखा वह और भी हास्यास्पद है। पुडा के अनुसार 2003 से लेकर 2009 तक सात सालों में 9 मोबाइल टावर लगे हैं। यह सभी पुडा की इजाजत के बगैर ही लगे हैं। टावर लगाने वाली कंपनी का उक्त प्लाट या साइट के साथ कोई संबंध नही है, इसलिए इन कंपनियों के खिलाफ पुडा की ओर से कोई सीधी कार्रवाई करना असंभव है। बिना इजाजत लगाए गए टावरों की इमारतों के कुछ अलाटियों को नोटिस जारी किए जा रहे है। आज तक किसी टावर को गिराया नहीं गया, इसलिए इस पर खर्चे का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। इनमें से किसी भी मोबाइल कंपनी पर किसी प्रकार की कोई पैनल्टी भी नहीं लगाई गई है।