पटियाला. मेडिकल कालेज पटियाला व अमृतसर में मेडिकल अफसरों (एमओ) से लेक्चरर कम टच्यूटर प्रमोट किए गए 35 डाक्टरों व कालेज प्रशासन के बीच अंदरूनी झगड़ा पनपने लगा है। एक तरफ इन डाक्टरों का कहना है कि जब उन्हें सुविधाएं मेडिकल अफसरों की मिल रही हैं तो भला वह लेक्चरर का काम कैसे करेंगे।
उधर, मेडिकल कालेजों से इन डाक्टरों को अब लेक्चर देने के लिए नोटिस भी जारी होने लगे हैं। ऐसे में लेक्चरर कम टच्यूटर बने इन डाक्टरों के बीच कसमकस पैदा हो गई है कि आखिर वह करें तो क्या करें? लेक्चरर कम टयूट्र प्रमोट हुए इन डाक्टरों व मेडिकल कालेज प्रबंधन का विवाद लंबा खिंचने के आसार दिखाए दे रहे हैं।
सुनवाई नहीं होती तो अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे
प्रमोट हुए लेक्चरर कम टच्यूटरों का कहना है कि जो जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है उसे वह पूरी जिम्मेदारी से निभाएंगे। काम करने के बाद भी यदि उन्हें मेहनताना नहीं मिलेगा तो इंसाफ के लिए वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि विभाग उनके साथ खिलवाड़ करता आ रहा है।
पहले कुछ मेडिकल आफिसरों को लेक्चरर प्रमोट कर दिया लेकिन बाद में उन्हें डिमोट करते हुए लेक्चरर कम टच्यूटर बना दिया। अब प्रमोट हुए 6 डाक्टरों को तो क्लीयर कट आदेश दिए गए हैं कि तीन साल बाद उन्हें सेहत विभाग में भेज दिया जाएगा जबकि सेहत विभाग ने लेक्चरर बनते ही उन्हें विभाग से रिलीव कर दिया था।
डाक्टरों के लिए क्या करें क्या न करें की स्थिति
मेडिकल शिक्षा विभाग की ओर से प्रमोट किए गए इन डाक्टरों को साफ निर्देश दिए हैं कि उन्हें लेक्चरर जैसी कोई सुविधा नहीं मिलेगी तथा न ही कोई एक्सपीरियेंस सर्टिफिकेट मिलेगा। मेडिकल कालेज के प्रोफेसरों द्वारा डाक्टरों को नोटिस भी भेजे जा रहे हैं कि वह स्टूडेंट्स को लेक्चर दें।