Ludhiana
मालवा : खुले में लाखों टन अनाज
Bhaskar News Saturday, October 24, 2009 02:37 [IST]  

लुधियाना. देश में कहीं पर सूखे की मार है और लोग अनाज के बिना फाके काटने को मजबूर है। वहीं मालवा में सरकारी एजेंसियों ने लाखों टन अनाज को खुले में रखकर खराब होने के लिए छोड़ दिया है। एजेंसियों का कहना है कि उनके पास अनाज रखने के लिए जगह नहीं है। अगर पंजाब से केंद्र सरकार ने गोदामों के गेहूं को न उठवाया, तो आने वाले दिनों में चावल रखने की भी समस्या पैदा हो जाएगी।



फूड कारपरेरेशन के मुताबिक यहां उनके पास सवा सात लाख मीट्रिक टन गोदामों में और पौने दो लाख मीट्रिक टन अनाज गोदाम से बाहर रखने की क्षमता है। मौजूदा हालातों में एफसीआई का करीब 74 हजार मीट्रिक टन अनाज खुले में पड़ा है। इसी प्रकार पनग्रेन का करीब 6329 मीट्रिक टन अनाज गोदाम के भीतर और 51610 मीट्रिक टन अनाज खुले में पड़ा है। पंजाब एग्रो के पास 10 हजार मीट्रिक टन अनाज स्टोर करने की क्षमता है, जबकि 85 हजार टन अनाज खुले में पड़ा है।



अन्य एजेंसियों के मुकाबले में पंजाब वेयर हाउसिंग कारपरेरेशन की स्थिति बेहतर है। एजेंसी के पास 25 लाख मीट्रिक टन अनाज रखने की क्षमता है, जबकि गोदामों के भीतर साढ़े दस लाख मीट्रिक टन अनाज पड़ा है। मार्कफेड के पास 1.49 लाख मीट्रिक टन गोदामों के भीतर पड़ा है, जबकि 12,200 मीट्रिक टन अनाज को रखने के लिए किराये पर गोदाम ले रखे हैं। 60 हजार टन अनाज खुले में पड़ा है।



सरकारी एजेंसियों के पास गोदामों में पड़े अनाज के आंकड़े स्थिति बयां कर रहे है कि कितना अनाज खुले में पड़ा है और कितना अनाज गोदामों के भीतर पड़ा हुआ है। मार्कफेड के जिला प्रबंधक (डीएम) हरदीप सिंह कहते हैं कि चावल तो कभी भी खुले गोदामों में नहीं रखा जाता। गेहूं को तकनीकी तरीकों से खुले में रखा जाता है।



पटियाला जिला में पांचों सरकारी खरीद एजेंसियों पंजाब एग्रो फूडग्रेन कापरेरेशन, पनसप, मार्कफेड, पनग्रेन और पंजाब स्टेट वेयरहाऊसिंग कापरेरेशन के पास जितना गेहूं स्टोर किया हुआ है, उसका अस्सी फीसदी से ज्यादा गेहूं खुले में ही स्टोर किया गया है।



खुले में कच्चे स्थानों पर रखे इस गेहूं को सुरक्षित रखने के नाम पर जहां अनाज की बोरियों के नीचे लकड़ी के रैक लगा दिए जाते हैं वहीं ऊपर से बोरियों के इन ढेरों को तिरपालों से ढांप कर तिरपालों को रस्सियों से बांध दिया जाता है। अनाज को सुरक्षित रखने के इन सरकारी प्रयासों की हवा तब निकल जाती है जब बारिश के साथ तेज आंधी भी चलने लगती है।



दैनिक भास्कर ने जब पटियाला, सनौर इत्यादि स्थानों पर विभिन्न एजेंसियों का दौरा किया तो पाया कि ओपन गोदामों में रखे अनाज की सुरक्षा के लिए किए प्रयासों को मौसम कभी भी तार तार कर सकता है। पंजाब एग्रो के जिला में नाभा, सनौर, समाना, देवीगढ़, राजपुरा, पातड़ां, समाना, पटियाला और भादसों में गोदाम हैं। इन सभी गोदामों पर गेहूं की दो -दो लाख बोरियां लगायी गई हैं व प्रत्येक बोरी में पचास किलो गेहूं है। यहां आश्चर्य की बात है कि पंजाब एग्रो का राजपुरा स्थित गोदाम ही कवर्ड है और बाकी सभी गोदाम ओपन हैं।



ओपन पलिंथों में पड़ी हैं हजारों बोरियां



बेशक राज्य के शेलरों में 40 हजार ट्रकों का चावल पड़ा है, जो डिस्कलर हो रहा है, दूसरी ओर डिस्कलर की वजह से एफसीआई सरकारी एजेंसी ने 272 शेलरों को डिफाल्टर घोषित कर बंद कर दिया है तथा 10 लाख टन चावल अभी शेलरों में लगना बाकी है। हालांकि आगे नए धान की फसल भी मंडियों में पहुंच चुकी है। लेकिन क्षेत्र के गोदाम भरे होने तथा ओपन पलिंथों में पड़े अनाज के बाद नए धान की फसल को गोदामों में रखना कैसे सम्भव हो पाएगा।



यहां भी सवालिया निशान



बठिंडा अनाज के एक्सपोर्ट की कमी के अभाव से जिले मंे पिछले ढाई साल का हजारांे मिट्रिक टन अनाज खुले में पड़ा है। इनको बरसात से बचने के लिए तिरपाल से ढक कर रखा गया है। इसमंे से 12 करोड़ रुपए का अनाज तो ऐसा है, जो पिछले ढाई साल से एक्सपोर्ट ही नहीं हो पाया।



इससे उसकी क्वालिटी को लेकर भी सवाल उठ रहा है। गौरतलब है कि जिले में विभिन्न खाद्य एजेंसियांे का 10,68,878 मिट्रिक टन अनाज जिले के गोदामांे मंे है। अनाज को किराए के गोदामांे मंे रखने पर ही पिछले ढाई साल मंे 78 लाख रुपए से ज्यादा राशि खर्च है।



चूहांे व अन्य कीटांे से इसे बचाने को इस्तेमाल किए कीटनाशकांे पर लाखांे रुपए खर्च हो चुके हैं। 80 फीसदी खुले आसमान तले बने गोदामांे मंे पड़े इस अनाज को भरने के लिए इस साल इस्तेमाल किए गए प्लास्टिक बैग भी फटने लगे हैं। वर्ष 2008 का अत्यधिक अनाज एक्सपोर्ट न होने से वित्तीय वर्ष 2009—10 मंे खरीदे गए अनाज मंे 3,46,961 मिट्रिक टन अनाज के भंडारण को गोदामांे को किराए पर लेना पड़ा।



यही नहीं वर्ष 2007 का भी 10,002 एमटी अनाज गोदामांे मंे पड़ा सड़ रहा है, जो ढ़ाई साल से एक्सपोर्ट नहीं हुआ। जबकि वर्ष 2008 मंे विभिन्न खाद्य एजेंसियांे ने 6,14,378 एमटी अनाज की खरीद की थी। मगर इसमंे से 47 फीसदी अनाज एक्सपोर्ट ही नहीं हो पाया, जो गोदामांे मंे भरा हुआ है। ऐसे मंे वर्ष 2009-10 मंे जब 8,85,797 एमटी अनाज की खरीद हुई तो खाद्य एजेंसियांे व फूड सप्लाई विभाग को किराए के गोदामांे का जुगाड़ करना पड़ा।

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