Ludhiana
किसान करते रहे पवार का इंतजार
अशोक सिंघी Saturday, October 24, 2009 02:50 [IST]  

खन्ना (लुधियाना). एशिया की सबसे बड़ी आनाज मंडी खन्ना में शुक्रवार को किसान केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार का चेहरा देखने के लिए तरस गए और पवार उनसे बिना मिले ही लौट गए। किसानों को आस थी कि केंद्रीय कृषि मंत्री मंडी में उनके द्वारा लगाई गई धान की ढेरियों पर आएंगे, आकर उनकी समस्याएं सुनेंगे। इस बात का अंदाजा शरद पवार को लग जाएगा कि किस प्रकार सूखे के बावजूद पंजाब के किसानों ने धरती का सीना चीर कर पानी निकाल कर धान पैदा किया है, ताकि देश में अन्न संकट पैदा न हो।



पंजाब व हरियाणा का किसान देश के अन्न भंडारों में धान की 60 फीसदी फसल भेजता है। किसानों को सुबह जब यह पता चला कि शरद पवार खन्ना अनाज मंडी में आ रहे हैं, तो किसान अपनी अपनी ढेरी पर मुस्तैद होकर बैठ गए। उन्हें क्या पता था कि पवार भारतीय खाद्य निगम के अधिकारियों द्वारा लगवाई गई अच्छे धान की दो ढेरियां ही देखेंगे और मार्केट कमेटी दफ्तर में राइस शैलर मालिकों के बात करते लौट जाएंगे।



पत्रकार बाहर जाएं या मैं चला जाऊंगा



केंद्रीय कृषि मंत्री ने पत्रकारों से भी मिलने से मना कर दिया। जब कुछ पत्रकार शरद पवार के बैठक स्थल पर पहुंचे तो पत्रकारों को कमरे में देख्रकर वे गुस्सा गए और अपनी सीट से खड़े हो गए। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वे या तो कमरे से बाहर निकल जाएं, नहीं तो वे चले जाएंगे।



गार्ड आफ ऑनर का निरीक्षण भी नहीं किया



केंद्रीय कृषि मंत्री इतनी जल्दी में थे कि उन्होंने अपने स्वागत में लगाई गई गार्ड आफ आनर का निरीक्षण भी नहीं लिया। इस बात से हैरत में आए पुलिस अधिकारी यह कहते रहे कि केंद्रीय मंत्री जाते समय गार्ड आफ आर्नर का निरीक्षण करेंगे। गार्ड आफ आर्नर का निरीक्षण करना तो दूर पुलिस कर्मियों की तरफ पलट कर भी नहीं देखा।



अधिकारियों के काफिले का साथ आए पवार आधे घंटे में ही मार्केट कमेटी में बैठक निपटाकर चंडीगढ़ के लिए रवाना हो गए। पत्रकारों ने जाते समय भी उनसे बातचीत करने की कोशिश की, पर पवार टस से मस नहीं हुए। बोले की कोई बात नहीं करूंगा।



शरद पवार के साथ बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री आदेश प्रताप सिंह, पंजाब के प्रधान सचिव डीएस गुरु, भारतीय खाद्य निगम के अधिकारी, पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन अजमेर सिंह लक्खोवाल, भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल आदि मौजूद थे।



मिलर्स ने उठाया किस्म 201 का मुद्दा



बैठक में राइस मिलर्स ने चावल की किस्म 201 का मुद्दा शरद पवार के सामने रखा। उन्होंने बताया कि धान की किस्म पीआर 201 में डैमेज डिस्कलर 8 से 10 फीसदी आता है, जबकि भारतीय खाद्य निगम 4 फीसदी डैमेज डिस्कलर की इजाजत देता है। 5 फीसदी से ऊपर डैमेज डिस्कलर होने पर चावल को जहरीला पदार्थ माना जाता है।



भारतीय आवश्यक वस्तु कानूनी की धारा 7 एसी में केस दर्ज किया जाता है। सोफ्त ने बताया कि इस धान की जैनेटिक समस्या है, जिसे दूर नहीं किया जा सकता। यहां तक कि इसे पशु चारे में भी जहरीला पदार्थ माना जाता है। उन्होंने कहा कि जो चावल का पिन प्वाइंट होता है, अगर वह भी काला हो तो पूरे चावल को डेमैज डिस्कलर माना जाता है, यह नहीं होना चाहिए।



उन्होंने डैमेज डिस्कलर की छूट 5 फीसदी करने और धान में से चावल की वापसी 67 फीसदी की बजाए 64 फीसदी करने की मांग की, ताकि चावल को सोटेक्स (पॉलिश) करवाने में 100 रुपये प्रति क्विंटल का जो खर्च आता है, उसे बचाया जा सके। बलबीर सिंह राजेवाल ने बासमती की किस्म 1121 का रेट गिरकर 1500 से 1900 होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस बार पंजाब में बासमती 1121 का रकबा बढ़कर 5 लाख 80 हजार हेक्टेयर हो गया है। व्यापारी किसान से सस्ती बासमती खरीदकर बाद में उसे महंगा कर देंगे।



किसानों का दर्द, नहीं बिक रहा पीआर 201



किसान खन्ना मंडी में ही बड़ी मात्रा में धान की किस्म पीआर 201 लिए बैठे हैं, पर उनका यह धान बिक नहीं रहा है। रतनहेड़ी के किसान जगतार सिंह ने बताया कि उसकी 22 एकड़ जमीन है। एक सप्ताह से वह धान लिए खन्ना मंडी में बैठा है, पर उसका धान नहीं बिक रहा।



जबकि एक किसान जसबीर सिंह गगढ़वाल नजदीक चमकौर साहिब ने भी अपनी यही व्याथा सुनाई। उनसे बताया पीआर 201 धान की एक ऐसी किस्म है, जिसको उगाने से एक एकड़ जमीन में 35 से 40 क्विंटल धान निकलता है, जोकि किसी अन्य किस्म से नहीं निकलता है।



अब उनका धान एक सप्ताह से नहीं खरीदा जा रहा। एक और किसान पुरुषोत्तम सिंह ने बताया कि उन्हें तो आशा थी कि केंद्र सरकार इस बार धान पर बोनस की घोषणा करेगी। आढ़ती एसोसिएशन के भलिंदर सिंह ने बताया कि जिला लुधियाना में 40 फीसदी रकबे में किसानों ने पीआर 201 धान बीज रखा है।



मंडियों में माल के अंबार लगे हैं, पर पीआर 201 को न तो एफसीआई खरीद रही है और न ही राइस शैलर। पीआर 201 किस्म के धान की बिक्री न होने से किसान तो खफा हैं हीं, शैलर मालिक भी इससे परेशान हैं। इस किस्म के धान की मिलिंग दौरान डैमेज और डिस्कलर की मात्रा काफी अधिक है।



इस कारण शैलर मालिक इस किस्म के धान से परहेज कर रहे हैं। शैलर एसोसिएशन के जिला उप प्रधान निर्मल ¨सह नागरा, सतीष मित्तल, सुशील लूथरा और अजय बांसल ने बताया कि पीआर 201 धान की सैंपल के तौर पर मिलिंग करवाई गई। उन्होंने बताया कि मिलिंग के नतीजे चौंकाने वाले हैं। इस किस्म के धान की मिलिंग में डैमेज मात्रा 8 फीसदी से भी अधिक आई है।



पत्रकारों का दल बाल-बाल बचा



शरद पवार का खन्ना दौरा कवर करने गए प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के आधा दर्जन पत्रकार पंजाब सरकार की 1993 माडल ट्रैक्स गाड़ी की ब्रेक फेल होने के बाद बाल बाल बच गए। हुआ यूं कि ग्यासपुरा चौक के पास लाल बत्ती पर बहुत से वाहन खड़े थे। ट्रैक्सी गाड़ी का ब्रेक अचानक फेल हो गई।



ड्राइवर जोगिंदर सिंह ने आपात स्थिति को भांप लिया और गाड़ी को ग्यासपुरा चौक से खाली सर्विस लेन की तरफ घुमाकर एक गड्ढे में धकेल दिया, जहां जाकर गाड़ी रुक गई और छह पत्रकार बाल बाल बच गए। वाहन उलट भी सकता था। असल में शुक्रवार की सुबह पत्रकारों ने जिला लोक संपर्क अधिकारी को यह गाड़ी न ले जाने की सलाह दी थी। खन्ना पहुंचने पर भी इस गाड़ी को बदलने का आग्रह किया गया था, लेकिन जिला लोक संपर्क अधिकारी के कान पर जूं तक न रेंगी।



इसलिए पत्रकारों को इसी गाड़ी से वापस लौटना पड़ा और रास्ते में गाड़ी का ब्रेक फेल हो गया। यह मामला पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के सलाहकार दलजीत सिंह चीमा और सूचना व लोकसंपर्क विभाग के निदेशक गगनदीप सिंह बराड़ के नोटिस में भी लाया गया है। उन्होंने भी लुधियाना की इस गाड़ी को सड़क से हटवाने का विश्वास दिलाया है। वैसे भी 15 साल के बाद गाड़ी को सड़क से हटाना चाहिए, इसे तो 16 साल हो गए।

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