चंडीगढ़. केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल के बाद खेल व युवा मामलों के मंत्री एमएस गिल भी पंजाब यूनिवर्सिटी को नसीहत दे गए। पीयू में बनने वाली इनडोर शूटिंग रेंज के आधारशिला रखने के बाद गिल ने कहा कि इन प्रोजेक्टों को तय अवधि में पूरा किया जाना चाहिए। क्योंकि यह देश शिलान्यासों की कब्रगाह बन चुका है। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि पीयू ऐसा नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को निरंतर प्रयासों की जरूरत है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि खेलों में पंजाब अपनी पहचान खो रहा है। यहां युवाओं पर शराब, नशाखोरी और टीवी का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इस बारे में हमें चिंतन करना होगा। पीयू को पुरस्कारों के बजाय आईटी, न्यूक्लिअर साइंस, फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे विषयों पर आधरित शिक्षा की तरफ ध्यान देना होगा। हीर—रांझा पर पीएचडी कराने से बेहतर है कि विद्यार्थियों को समय की जरूरत के हिसाब से ठोस शिक्षा दी जाए। गिल ने कहा कि शिक्षा के मामले में शिक्षण संस्थान पिछड़ रहे हैं।
अगर विद्यार्थियों को करिअर ओरिएंटेड शिक्षा दी जाए तो हमें उनके लिए नौकरियां पैदा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि वे अपनी प्रतिभा के हिसाब से खुद ही रोजगार के अवसर ढूंढ़ लेंगे। गिल ने कहा कि स्कूल स्तर पर खेलों के लिए कोई ढांचा नहीं है। मानव संसाधन विकास मंत्रालय को स्कूलों को कम से कम खेल के मैदान और विद्यार्थियों को खेल की सुविधा नियमित करने की व्यवस्था करनी होगी। गिल ने कहा कि वह इस संबंध में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री से बात करेंगे।
इससे पहले पीयू के वीसी प्रो. आरसी सोबती ने कहा कि पीयू ने कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए हैं। फिर भी धन के अभाव में बेहतर कार्य नहीं कर पा रहे। प्रो. सोबती ने कंेद्रीय मंत्री से वित्तीय मदद का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस शूटिंग रैंज के पहले चरण को एक साल में पूरा करके खेल मंत्री एमएस गिल से ही उद्घाटन कराया जाएगा।
मार्किग सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा
खेल मंत्री एमएस गिल ने भरोसा दिलाया कि शिक्षण संस्थानों में खिलाड़ियों को दिए जाने वाले अंकों की व्यवस्था सही नहीं है। इस व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियां समय पर पूरी हो जाएंगी। खेल मंत्रालय की ओर से भारतीय ओलंपिक संघ, दिल्ली सरकार और दूसरी एजेंसियों को पूरी मदद दी जा रही है। खेल मंत्री ने कहा कि कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन देने के लिए तैयार किया जा रहा है। इनके लिए न सिर्फ विदेशी कोच बुलाए गए हैं बल्कि खिलाड़ियों को विदेश में कोचिंग भी दी जा रही है।