चंडीगढ़. सुर, संगीत और राग का ऐसा संगम कम ही होता है। भारतीय विद्या भवन में शनिवार शाम गायकी और रागों की ऐसी लय बंधी कि हर कोई संगीत के इस सफर पर चल पड़ा। इस सफर की ताजगी मंजिल तक कम नहीं हुई। होती भी क्यों न जब शुद्ध शास्त्रीय और मौसिकी सुनने को मिले।
इंडियन नेशनल थियेटर द्वारा आयोजित चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन के दूसरे रोज विनीता गुप्ता की गायकी से कार्यक्रम शुरू हुआ। 26 साल से संगीत की साधना कर रहीं विनीता की गायकी के कौशल का असर हर सुनने वाले पर हुआ। इसके बाद बारी थी पाकिस्तान के सागर वीणा वादक रजा करीम की परंपरा को आगे बढ़ा रही नूर जेहरा की।
नूर जेहरा ने नौ तारों को छेड़ा तो दर्शक सागर वीणा के तीनों स्थानों मंदस्थान, मध्यस्थान और तारस्थान की लय महसूस करने लगे। फिर पं. विद्याधर व्यास ने ग्वालियर—आगरा घराने की शास्त्रीय गायकी की स्मृद्ध विरासत को चंडीगढ़ के दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया। पं. विद्याधर ने सभागार में दर्शकों को हिंदुस्तानी ख्याल और तराना का आनंद लेने का भरपूर मौका दिया। इस तीन दिवसीय आयोजन के आखिरी रोज रविवार सुबह पं. विद्याधर व्यास को सुनने का मौका मिलेगा।