Monday, Dec 7th, 2009, 7:41 pm [IST]  
danik bhaskar8 घंटे शेयर बाजार: आह या वाह!
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14698596_sensex_up_gainअब जल्दी ही भारतीय शेयर बाजार 8 घंटे तक खुले रहेंगे, सुबह 9 बजे से 5 बजे तक। कारोबार का समय बढ़ने का क्या असर पड़ेगा बाजार पर, बाजार से जुड़े लोगों पर? इस बारे में बाजार के जानकारों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है। हालाँकि समय के बारे में अंतिम फैसला स्टॉक एक्सचेंजों को करना है, लेकिन शेयर बाजार की नियामक संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आठ घंटे के कारोबार की अनुमति दे दी है। सेबी ने स्टॉक एक्सचेंजों को कैश और इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट में 8 घंटे का कारोबार चलाने की अनुमति शुक्रवार को दे दी। अब गेंद स्टॉक एक्सचेंजों के पाले में है और उन्हें तय करना है कि वे कारोबार का समय कितना बढ़ाते हैं और कब से। यदि सेबी के नजरिये की बात करें, तो भारतीय कारोबारियों को वैश्विक बाजारों की सूचनाओं और संकेतों से अधिक लाभ दिलाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। लेकिन क्रिस के निदेशक अरुण केजरीवाल याद दिलाते हैं कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने कारोबार का समय बढ़ाने की माँग सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज में निफ्टी के कारोबार से समय का तालमेल बिठाने के लिए रखी थी। सुबह 9 बजे से कारोबार शुरू करने से भी यह समस्या जस की तस बनी रहेगी, क्योंकि सिंगापुर में कारोबार भारतीय समय के हिसाब से सुबह 7 बजे ही शुरू हो जाता है। यही नहीं, कारोबार जल्दी शुरू करने कुछ दिक्कतें भी सामने आ सकती हैं। हमारे यहाँ काफी बैंक इतनी सुबह से काम शुरू नहीं करते, ऐसे में लोगों को कारोबार करने में कुछ समस्या होगी। अरुण केजरीवाल यह भी मानते हैं कि एक्सचेंजों के ऑपरेटर लगातार आठ घंटे काम करने की स्थिति में नहीं रह सकते। ऐसे में एक्सचेंजों को उनके विकल्पों के बारे में भी सोचना पड़ेगा। आँकड़ों की उपलब्धता की समस्या भी बढ़ जायेगी। इस समय जब कारोबार 3.30 बजे खत्म होता है, तब शाम 6 बजे तक ही आँकड़े उपलब्ध हो जाते हैं। लेकिन यदि कारोबार 5 बजे खत्म होगा, तो ये आँकड़े मिलने में और भी देर होगी।हालाँकि अरुण केजरीवाल इस बात पर आशंका जाहिर करते हैं कि इससे हमारे बाजारों में कारोबार की मात्रा बढ़ेगी। लेकिन ग्लोब कैपिटल के पीएमएस प्रमुख के के मित्तल को लगता है कि इससे भारतीय बाजारों का कारोबार थोड़ा बढ़ सकता है। आज कल स्थिति यह है कि विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) अमेरिकी बाजारों और एशियाई बाजारों के संकेतों के अनुरूप एसजीएक्स निफ्टी में ही कारोबार कर लेते हैं। कारोबार का समय बढ़ाने का यह फैसला इस स्थिति से बचने की दिशा में उठाया गया एक कदम है। के के मित्तल के अनुसार समय बढ़ा कर आठ घंटे करने से भारतीय कारोबारियों को अपने कारोबार के लिए अधिक अवसर मिल सकेगा। हालाँकि यह एक चिंता अवश्य है कि कारोबार के आँकड़े मिलने में देरी होगी। लेकिन कपूर शर्मा एंड कंपनी के पार्टनर सलिल शर्मा को नहीं लगता कि इससे बाजार में कारोबार की मात्रा बढ़ेगी। उनके अनुसार आठ घंटे के कारोबार की कोई जरूरत नहीं है। मौजूदा वक्त में जो कारोबार होता है, उसमें शुरुआती डेढ़-दो घंटे के बाद कारोबार की मात्रा काफी कम हो जाती है और 11.30 से 2.30 बजे तक काफी कम कारोबार होता है। एक समस्या यह भी होगी कि दिन के कारोबार का आँकड़ा मिलने में वक्त लगेगा। सलिल शर्मा के अनुसार हमारे यहाँ बैंकिंग व्यवस्था अभी उतनी चुस्त और दुरुस्त नहीं है कि इतनी लंबी अवधि का कारोबार किया जा सके। यदि सुबह एसजीएक्स में होने वाले निफ्टी कारोबार को अपने यहाँ लाने का उद्देश्य है, तो यह किया जा सकता था कि निफ्टी एक घंटे पहले खोल दिया जाता। इससे कुछ हद तक लाभ होने की संभावना थी। लेकिन सभी एक्सचेंजों में पूरे कैश और इक्विटी डेरिवेटिव सेगमेंट के कारोबार का वक्त आठ घंटे करने की जरूरत नहीं थी। इससे ब्रोकरों को दिक्कत काफी बढ़ जायेगी और उन्हें लंबे समय तक काम करना पड़ेगा।टेक्निकल ट्रेडर्स ऑफ इंडिया के सीईओ एम बी सिंह के विचार भी सलिल शर्मा की सोच से मेल खाते दिखते हैं। एम बी सिंह के अनुसार बाजार का समय बढ़ाने का विचार अनावश्यक है, क्योंकि इससे समस्या का समाधान हो नहीं रहा और दिक्कत अलग से बढ़ने वाली है। एक दिक्कत यह भी है कि देश में बैंक अभी भी इस तरह के कारोबार के लिए तैयार नहीं हैं। उनके अनुसार हो सकता है कि कारोबार की मात्रा बढ़े, लेकिन निवेशकों को इससे लाभ नहीं होने वाला है। इसके अलावा ब्रोकरों को अनावश्यक रूप से अधिक समय तक काम करना पड़ेगा। यह कहा जा रहा है कि सिंगापुर निफ्टी से समय का तालमेल बिठाया जा रहा है, लेकिन सुबह नौ बजे बाजार खोलने के बावजूद 2 घंटे का अंतर बना रहेगा। सिंगापुर निफ्टी से वक्त का तालमेल बिठाने का तर्क पर्पललाइन इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के निदेशक पी के अग्रवाल के गले भी नहीं उतरता। वे कहते हैं कि लोग एसजीएक्स में कारोबार की सहूलियत की वजह से सिंगापुर निफ्टी में कारोबार करते हैं। ऐसे में यदि एनएसई में कारोबार बढ़ाना है, तो यहाँ कारोबार करने में आने वाली दिक्कतें कम करने से इसका हल निकलेगा, न कि कारोबार का समय बढ़ाने से। पी के अग्रवाल का मानना है कि समय बढ़ाने से हमारे यहाँ कारोबार की मात्रा पर बहुत अधिक फर्क पड़ने की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि हमारे यहाँ ब्रोकिंग सिस्टम व्यवस्थित नहीं है, ऐसे में इस तरह की समय सारणी लागू करने से दिक्कतें बढ़ेंगी। इन लोगों को अधिक समय तक काम करना पड़ेगा, ऐसे में हो सकता है कि इनके यहाँ शिफ्ट व्यवस्था लागू हो जाये।लेकिन रेलिगेयर सिक्योरिटीज के राष्ट्रीय प्रमुख (रिटेल) आशु मदान के अनुसार हो सकता है कि ब्रोकर्स को प्रशासनिक स्तर पर थोड़ी दिक्कत हो, लेकिन वे इस बदलाव के अनुरूप स्वयं को तैयार कर लेंगे। समय बढ़ाने के इस निर्णय से एसजीएक्स के कारोबार से समय को जो अंतर है, वह कम होगा और साथ ही हमारे बाजार में कारोबार की मात्रा बढ़ेगी। आशु मदान का मानना है कि इस समय कई खबरें बाजार बंद होने के बाद आती हैं और बाजार उस पर तुरंत अपनी प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। लेकिन कारोबार का समय शाम पाँच बजे तक बढ़ा देने से ये समस्या भी कुछ हद तक कम हो सकेगी। हालाँकि साथ ही उनका यह भी मानना है कि कारोबार के लंबे घंटों के बीच बाजार में कुछ सीमा तक सुस्ती भी बढ़ सकती है। साइक्स एंड रे इक्विटीज के तकनीकी विश्लेषक नितेश चांद के अनुसार बढ़े समय से तालमेल बिठाने के लिए संस्थाओं को अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ानी पड़ सकती है। दिक्कत यह भी है कि हमारे यहाँ बैंकिंग व्यवस्था भी इस बदलाव के अनुरूप नहीं है। उनका मानना है कि बाजार का वक्त बढ़ने से कारोबार की मात्रा पर कुछ सकारात्मक असर अवश्य ही पड़ेगा, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि हमारे निवेशकों के पास कारोबार का अधिक अवसर होगा। लेकिन इन सब बातों के बीच एक तबके को तो हम भूल ही गये, जिसे फेसबुक पर अपनी एक टिप्पणी में याद किया सीडी इक्विसर्च के निदेशक राजेश अग्रवाल ने। राजेश कहते हैं, “हर कोई ब्रोकरों, उनके कर्मचारियों वगैरह के बारे में चर्चा कर रहा है, लेकिन बिजनेस न्यूज चैनलों के ऐंकरों, मेहमानों और मेहमान संयोजकों (गेस्ट को-ऑर्डिनेटर) का क्या होगा!” फेसबुक पर ही उनका जवाब दे रहे हैं जाने-माने तकनीकी विश्लेषक प्रकाश गाबा, “ज्यादा ऐंकरों की जरूरत होगी, ज्यादा मेहमान विश्लेषकों की भी और ज्यादा मेहमान संयोजकों की भी। ज्यादा कार्यक्रम बनाने होंगे। प्राइम टाइम और टीआरपी का असर दूसरे टीवी चैनलों के कारोबार पर भी पड़ेगा। टीवी देखने के बारे में लोगों का व्यवहार भी बदलेगा और इन सबके बीच अपना तनाव हल्का करने के लिए लोगों के पास कम समय होगा।” (© शेयर मंथन, 25 अक्टूबर 2009)







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विचार:

KAMLESH

Monday, 26th Oct 2009, 21:24
AFTER ALL THIS IS GOING TO PRESSURISED EMPLOYEES AND THEY HAVE TO WORK MORE THAN 12 HOURS DAILY TO COMPLETE ALL THE PROCESSES

ajit kumar bothra

Thursday, 29th Oct 2009, 8:32
my think , trade time....9 to 4 hona

niraj kumar

Sunday, 1st Nov 2009, 19:15
मॆरॆ समझ् सॆ यह् आज् कॆ बजार् कि जरुरत् है

SANDEEP

Friday, 6th Nov 2009, 12:43
बीळ्कूळ् गाटीया टआएम् हे बोळ्ड् ओप्ऱेटेऱ्ष् की व्हाट् ळाग् जाय्गी

apne vichaar
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