न कार्तिक समो मासो न कृतेन समं युगम्।
इस माह में किए समस्त मांगलिक कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि दान, पुण्य एवं ब्रामुहूतीर्य स्नान इस मास में धर्मनिष्ठ लोग बहुत श्रद्धा से करते हैं। यह मास अत्यंत पवित्र और दोषरहित होता है। इस माह में गुरु-शुक्रास्त दोष, ग्रहण दोष, लग्न दोष, अयन दोष तिथि नक्षत्रादि दोष, गोचर आदि दोष प्रभावहीन हो जाते है। इस माह में विवाहादि शुभ कार्य भी किए जा सकते हैं।
विवाह के लिए कुछ अबूझ मुहूर्त जैसे अक्षय तृतीया, देव प्रबोधिनी एकादशी, आषढ़ शुक्ल पक्ष नवमी, चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी (राम नवमी) आदि अति शुभ माने गए हैं।
अगर वर का सूर्य बल क्षीण हो तो सूर्य की पूजा व दान करना चाहिए। वर की कुंडली में सूर्य प्रथम, द्वितीय, पंचम, सप्तम या नवम हो तो विशेष अनुष्ठान द्वारा इस दोष का निवारण कर सकते हैं।
कन्या की राशि से गुरु अगर प्रथम, द्वितीय, पंचम, सप्तम या नवम हो तो कन्या को बृहस्पति ग्रह की पूजा व दान करना चाहिए।
विवाह हेतु गोधूलि बेला बहुत शुभ मुहूर्त है। कई दोषों के निवारण के लिए इस समय का उपयोग किया जाता है।
यदि बाधक योग या किसी प्रकार का शूल हो और कार्य करना अति अनिवार्य हो तो गोधूलि बेला में करने से शुभ रहेगा।
यदि वर-कन्या मंगली हो तो प्रभावित कन्या या वर का केले के तने के साथ विवाह करें। शास्त्रो में इस योग की निवृत्ति हेतु घट-विवाह करने से निवारण हो सकता है।
विवाह के लिए मुहूर्त का अपना महत्व है। ज्योतिषीय सिद्धांतों और ब्रrांड में विचरण कर रहे ग्रहों की स्थितियों की गणना के आधार पर विवाह किए जाएं तो उसकी सफलता में कोई संशय नहीं रहता। अशुभ, शुभ में बदल सकता है। विवाह समय के अशुभ ग्रहों का यथाशक्ति दान व पूजा अवश्य करवा लेनी चाहिए।