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ओशनोग्राफी गहरे पानी में आकार लेता भविष्य
Bhaskar News Monday, October 26, 2009 00:49 [IST]  

Careerओशनोग्राफी महासागरों के बारे में वैज्ञानिक दृष्टि और व्यापकता से जानने का विज्ञान है। अगर विस्तृत स्तर पर बात करें तो यह समुद्र, तटीय क्षेत्र, एस्ट्युरीज (नदी मुख), तटीय जल, शेलव्ज और ओशन बेड के बारे में जानने की विधा है। यह एक ऐसा विज्ञान है जिसमें बायोलॉजी, केमिस्ट्री, जियोलॉजी, मेटियोरोलॉजी और फिजिक्स के सिद्धांत लागू होते हैं। यह एक रोचक क्षेत्र है जहां आपको जीवनर्पयत सीखने को मिलता है।



काम का प्रारूप



विकासशील देशों के लिए ओशनोग्राफी का काफी महत्व है। इस क्षेत्र में काम करना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह उन लोगों का स्वागत करता है जिन्हंे महासागर की अपार गहराई के बारे में जानने और सीखने की जिज्ञासा है। इनके कार्य में नमूने चुनना, सर्वे करना और अत्याधुनिक उपकरणों से डाटा का आकलन करना शामिल है। इस क्षेत्र में काम करने वालों को ओशनोग्राफर कहते हैं, इनके काम में पानी के घुमाव और बहाव की दिशा, उसकी फिजिकल व केमिकल सामग्री के आकलन का कार्य शामिल है। इससे यह भी पता चलता है कि इनका तटीय इलाकों, वहां के मौसम और आबोहवा पर क्या असर होता है।



व्यापक दायरा



इस क्षेत्र से ज्यादातर केमिस्ट, फिजिसिस्ट, बायोलॉजिस्ट और जियोलॉजिस्ट जुड़े रहते हैं, जो अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल ओशन स्टडीज में करते हैं। यह पूरी तरह अध्ययन से जुड़ा क्षेत्र है। ऐसे में इस काम को करने के लिए समुद्र में लंबा वक्त गुजारना पड़ सकता है। इसके लिए मानसिक स्तर पर मजबूती की जरूरत होती है। इस काम में थोड़ा अनुभव होने के बाद अधिकांश लोगांे को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप अलग-अलग तरह का काम सौंपा जाता है। जिसमें मरीन बायोलॉजी, जियोलॉजिकल ओशनोग्राफी, फिजिकल ओशनोग्राफी और केमिकल ओशनोग्राफी शामिल है।



योग्यता



शैक्षणिक- विज्ञान विषयों में स्नातक लोग ओशनोग्राफी का कोर्स कर सकते हैं। इसके हर क्षेत्र में गणित की जरूरत पड़ती है। लेकिन मरीन रिसर्च के लिए स्नातकोत्तर या डॉक्टरेट की उपाधि होना जरूरी है। इसके अधिकतर कोर्स तीन वर्षीय होते हैं। इसकी कुछ शाखाओं में विशेषज्ञता हासिल करने से रोजगार के बेहतर विकल्प खुल सकते हैं।



व्यक्तिगत कुशलता- महासागरों के बारे में जानने और नया खोजने की उत्सुकता, सी वर्दीनेस (ओशन सिकनेस न होना), शारीरिक क्षमता, सहनशीलता, अकेलेपन और बोरियत के बीच मानसिक संबल बनाए रखना, टीम में काम करने के लिए सही माहौल बनाए रखना आवश्यक है। इन सबके अलावा तैराकी और डाइविंग में प्रशिक्षित होना यहां की प्राथमिक योग्यताओं में शामिल है।



रोजगार के अवसर- ओशनोग्राफर्स निजी, सार्वजनिक और कई सरकारी संस्थानों में वैज्ञानिक, इंजीनियर या तकनीशियन बतौर नौकरी पा सकते हैं। सरकार से जुड़े जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, मेटिरियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और डिपार्टमेंट ऑफ ओशनोग्राफी में विविध संभावनाएं मौजूद हैं। निजी क्षेत्र से जुड़ी कंपनियांे, मरीन इंडस्ट्री या इस क्षेत्र से जुड़ी रिसर्च संबंधी संस्थाओं में भी रोजगार के बढ़िया विकल्प सामने आते हैं।



कार्यक्षेत्र



केमिकल ओशनोग्राफी- यहां पानी के संयोजन और क्वालिटी का आकलन होता है। यह समुद्र की तलहटी में होने वाले केमिकल रिएक्शन पर नजर रखते हैं। इनका लक्ष्य ऐसी तकनीक भी खोज निकालना है जिससे समुद्र से महत्वपूर्ण बातें पता लगाई जा सकें। बढ़ते प्रदूषण के चलते इनके काम की चुनौतियां और बढ़ती जा रही हैं।



जियोलॉजिकल ओशनोग्राफी- जियोलॉजिकल और जियोफिजिकल ओशनोग्राफर्स सी-फ्लोर की वास्तविक स्थिति का पता लगाते हैं। समुद्र की तलहटी में पाए जाने वाले खनिजों की जानकारी भी यहीं से पता लगती है। यही लोग पता लगाते हैं कि समुद्र की भीतरी चट्टानें किस तरह और कितने समय के अंतराल में बनी हैं।



फिजिकल ओशनोग्राफी- फिजिकल ओशनोग्राफी समुद्र और महासागर के अध्ययन की विधा है। फिजिकल ओशनोग्राफर्स तापमान, लहरों की गति व चाल, ज्वार, घनत्व और करंट का पता लगाते हैं। यह ऐसा कार्यक्षेत्र है जहां समुद्र, मौसम और आबोहवा तीनों का जुड़ाव होता है।



मरीन बायोलॉजी- मरीन बायोलॉजी एक ऐसा क्षेत्र है जहां मरीन एनवायरमेंट का अध्ययन किया जाता है। यह समुद्र से प्राप्त होने वाले पदार्थो जैसे जहाज के टुकड़े, ग्रेव्ज, बिल्डिंग, टूल्स और पॉट्री का अध्ययन भी करते हैं। इन लोगों की आर्कियोलॉजी या एंथ्रोपोलॉजी की पृष्ठभूमि होना आवश्यक है। इसका मूल काम महासागर और तटीय संसाधनों का सही उपयोग भी है।



पारिश्रमिक



स्नातकोत्तर के बाद इस क्षेत्र में शुरुआत करने पर सरकारी क्षेत्र में 6-8 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र में यह थोड़ा ज्यादा हो सकता है। पीएचडी डिग्रीधारियों के लिए यहां 10-12 हजार रुपए से शुरुआत हो सकती है।



कोर्स कराने वाले संस्थान



आईआईटी, मद्रास
मुंबई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुंबई
कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कोचीन
अन्नामलई यूनिवर्सिटी, चिदंबरम, तमिलनाडू
बेरहामपुर यूनिवर्सिटी, बेरहामपुर, उड़ीसा

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