चंडीगढ़. भारतीय विद्याभवन में 32वें चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन के आखिरी दिन रविवार को शास्त्रीय गायक पं. विद्याधर व्यास ने यादगार बना दिया। पं. विद्याधर ने ग्वालियर घराने की शास्त्रीय शैली को प्रस्तुत किया।
सभागार में श्रोताओं को ख्याल, तराना और भजन सुनने को मिले। समापन मौके पर पं. विद्याधर ने अकेले ही लोगों के मनोरंजन का जिम्मा संभाला। हिंदुस्तानी राग संगीत पर अपनी पकड़ से पूरे कार्यक्रम को यादगार बना दिया। श्रोता आखिर तक सभागार में बैठे रहे।
गुरु पं. विष्णु दिंगबर पुलस्कर और पिता पं. नारायणराव व्यास की संगीत परंपरा पं. विद्याधर के माध्यम से चंडीगढ़ के लोगों को सुनने को मिली। पं. विद्याधर व्यास विदेशों में भी कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं। इस आयोजन में पं. विद्याधर की गायकी में नाट्य संगीत की हलकी झलक भी सुनने को मिली। इसी के साथ 32वां चंडीगढ़ संगीत सम्मेलन इंडियन नेशनल थियेटर की शास्त्रीय गीत—संगीत की विरासत को संजोए रखने की परंपरा को एक कदम और आगे बढ़ा गया।