चंडीगढ़. दो साल पहले मलोया के गवर्नमेंट हाई स्कूल को सीनियर सेकंडरी कर दिया, लेकिन सुविधाएं बढ़ाने के बजाय शिक्षा विभाग के आदेशों से तीन टीचर्स का तबादला जरूर कर दिया गया। अब इस स्कूल में 1400 विद्यार्थी पढ़ते हैं। पर स्कूल में मूलभूत सुविधाएं नाकाफी हैं।
10वीं के शिक्षक ही 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। अब तक राजनीति विज्ञान, इतिहास, हिंदी और फिजिकल एजूकेशन के शिक्षक की न तो पोस्ट मिली और नहीं पढ़ाने के लिए लेक्चरर। नर्सरी के विद्यार्थियों को ड्राइंग सिखाने वाली शिक्षिका सुरजीत कौर ही आठवीं के विद्यार्थियों को ड्राइंग पढ़ती हैं।
जबकि आठवीं में संस्कृत, ड्राइंग, होम साइंस में से एक विषय को पढ़ना और उसमें पास होना अनिवार्य है। बावजूद इसके स्कूल में तीनों विषय के शिक्षक नहीं हैं। पेरेंट्स टीचर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट रामकुमार ने बताया कि शिक्षा विभाग इस स्कूल के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। शिक्षा विभाग विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कई बार शिक्षा विभाग को शिक्षकों की कमी बताई लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा। फिजिकल एजूकेशन के टीचर करमजीत के मृत्यु के बाद अब तक पोस्ट खाली है। शिक्षा विभाग ने पीटीआई का पद खत्म कर स्कूल में डीपीई पद कर दिया। डीपीई का पद भी खाली है।
इस बदहाली का प्रमाण कई साल से स्कूल का गिरता रिजल्ट है। स्कूल का रिजल्ट 30 फीसदी ही रह गया है। लाइब्रेरियन का तबादला 2006 में हुआ। इसके बाद से पुस्तकालय लाइब्रेरियन के बिना है। वहीं कम्प्यूटर और साइंस लैब के छोटे और जर्जर कमरे बदहाली को बयां कर रहे हैं। कमरे में न टेबल है और नहीं विद्यार्थियों के बैठने की पर्याप्त व्यवस्था।
स्कूल का दौरा करेंगे
स्कूल में सुविधाओं को सुधारने के लिए काम किया जा रहा है। शिक्षकों की कमी है। इससे निपटने के लिए शिक्षकों को शिफ्ट में पढ़ाने के लिए लगाया जा रहा है। शिक्षास्तर को किसी भी कीमत पर गिरने नहीं दिया जाएगा। शीघ्र ही स्कूल का दौरा करेंगे।
सम्वर्तक सिंह डीपीआई स्कूल्स