चंडीगढ़. गुरदास मान एक आवाज ही नहीं, एक शख्सियत भी हैं, लेकिन उनके कदम आज भी जमीन पर हैं। पंजाबी गायकी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले गुरदास मान के लिए भगवान और अपने चाहने वालों के लिए सबसे ज्यादा आदर है।
सादगी और तहजीब उनके जेवर हैं। उन्होंने रविवार को सेक्टर-42 में हेल्दीवे द्वारा रखे गए सम्मान समारोह में शिरकत की। थोड़ी देर से पहुंचे तो आते ही मेजबानों और मीडिया से हाथ जोड़कर माफी मांगना नहीं भूले, बोले ‘गलती गुस्ताखी, मेहर करीं’। उन्होंने हेल्दीवे की दो कर्मचारियों मोनिका और सोनिका शर्मा को ऑल्टो कार की चाबियां देकर सम्मानित किया।
मोनिका और सोनिका बहनें हैं और बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें हेल्दीवे की ओर से यह पुरस्कार दिया गया। चाबियां देते वक्त गुरदास मान दोनों को बेल्ट लगाकर और धीरे गाड़ी चलाने की नसीहत देना नहीं भूले। हेल्दीवे की ओर से विदेश भेजे जाने वाले कमलजीत कौर, नवतेज सिंह, दीपक, लवदीप सिंह और हर्षप्रीत सिंह को गुरदास मान ने वीजा भी दिया।
मान गए गुरदास
वक्त की बंदिश न होती तो शायद चंडीगढ़ सारी रात झूमता रहता और गुरदास मान गाते रहते। वे आज पूरे मूड में थे और खचाखच भरे परेड ग्राउंड ने कोई कसर नहीं छोड़ी। मुद्दत बाद चंडीगढ़ से मिले शानदार रिस्पांस ने उन्हें ऐसा मदमस्त किया कि वे झूमते गाते कहीं के कहीं निकल गए। भीड़ जब छल्ले की मांग करने लगी तो मान बोले, ‘छल्ला मैं दूजे-तीजे नंबर ते सुनाणा सी, पर अज मैं पता नहीं किते होर ही निकल गया, शुक्रिया तूसीं मैनू मोड़ लेयाये।’
मान ने मंच पर आते ही लोगों के साथ ऐसा नाता जोड़ा जो करीब तीन घंटे तक चले इस कार्यक्रम के अंत तक नहीं टूटा। हां कुछ बैरियर जरूर टूट गए। मस्ती में झूमते हर किसी की एक ही कोशिश थी कि वह गुरदास के करीब पहुंचे। पुलिस झूमती भीड़ को संभालती तो गुरदास उसमें इतना जोश भर देते कि जिसको जहां जगह मिलती वह वहीं नाचने लगता।
बेशुमार युवाओं की भीड़ पर गुरदास ने दिल खोलकर अपना खजाना लुटाया, लेकिन साथ ही उन्हें यह नसीहत भी दे गए कि आधुनिकता की दौड़ में अपनी विरासत को न भूलें। गांव को याद रखें, अपनी जड़ों से दूर न हों। ‘थैंक्स और सॉरी’ की चमक में ‘शुक्रिया और मेहरबानी’ को न भूलें। चंडीगढ़ियों को पंजाब के गांवों की गलियों में उन्होंने घुमाया तो साथ ही ‘बड्डी बेबे दे हथ दे बणो साग’ दा स्वाद भी याद कराया।
‘इश्क दा गिड़दा पैंदा’ की शुरुआत करते हुए उन्होंने बताया कि इश्क में क्या कुछ नहीं करना पड़ता। उन्होंने अपने पैरों में बंधे घुंघरू दिखाते हुए कहा देखो मैं इश्क में क्या-क्या करता हूं और फिर यंग चंडीगढ़ को इश्क मोहब्बत के मायने कुछ इस तरह से समझाए- ‘इश्क को कम्पल्सरी सब्जेक्ट माना जाए, पागलों को परफेक्ट माना जाए।’ फिर साथ ही यह बताना नहीं भूले कि असली इश्क जिस्मानी नहीं बल्कि खुदा की बंदगी है।
यह नसीहत भी दी कि नशा और चोरी किसी से छिपती नहीं। भला किया हुआ कभी जाया नहीं जाता। साथ ही गुजारिश की- ‘मत जलाओ दुल्हनों को मालो-दौलत के लिए, वर्ना इक दिन अपनी बेटियां भी जल जाएंगीं।’कामयाबी की होड़ में किसी भी हद तक गुजर जाने की चाह रखने वालों को खबरदार करते हुए उन्होंने अपने खास अंदाज में एक और नसीहत दी, ‘रोटी हक दी खाइए जी, चाहे बूट पालशां करिए।’ उन्होंने कहा कि कामयाबी कांटों पर चलने वाले को मिलती है और आसमान भी उसे सिर पर बिठाता है, जो मिट्टी में खेला हो।
दैनिक भास्कर और हेल्दीवे इमिग्रेशन कंसल्टेंट की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में जब भीड़ पूरे जोश में थी तो गुरदास ने ‘मैं कमली यार दी कमली’ भी सुनाया। चंडीगढ़ के डीजीपी एसके जैन इस मौके पर मुख्य मेहमान थे। गुरदास मान की परफॉर्मेस देखकर वे बोले, गुरदास ने आज जमीन से जुड़ी कई यादें ताजा कर दीं। दैनिक भास्कर के सीओओ आशू फाके और चंडीगढ़ के यूनिट हेड केवल साहनी ने गुरदास मान को सम्मानित किया।