अर्थशास्त्र में अकाल के कारणों और निदान पर शोध के लिए नोबेल पुरस्कार जीतने वाले अमत्र्य सेन शांति निकेतन में सत्यजीत रे के सहपाठी थे और उनकी मित्रता हमेशा कायम रही। अधिकांश अकाल मनुष्य के लालच और प्रशासन के उनींदा होने के कारण होते हैं और दैवीय प्रकोप नहीं होते। संचार और आवागमन के साधनों के विकास के बाद तथाकथित अकाल क्षेत्र में पलक झपकते ही सहायता भेजी जा सकती है। अब अकाल में मृत्यु प्रशासन के मुंह पर तमाचा है।
ज्ञातव्य है कि सत्यजीत रे की बंगाल के अकाल पर बनी फिल्म ‘असनि संकेत’ (डिस्टेंट थंडर) में अकाल के समय चारों और हरियाली प्रस्तुत की गई है और उसे मनुष्य निर्मित त्रासदी की तरह प्रस्तुत किया गया है। क्या यह संभव है कि अपने मित्र की फिल्म देखने के बाद सेन महोदय ने अपना शोध प्रारंभ किया! उनकी प्रतिभा पर संदेह नहीं किया जा सकता, यह महज इत्तेफाक भी हो सकता है। विगत दशक में उनकी लिखी किताबें महान रचनाएं हैं। मुगल प्रशासन पर उनके लेख कमाल के हैं और दुनियाभर के संस्थान उन्हें भाषण के लिए आमंत्रित करते हैं। सेन महोदय की विद्वत्ता और निष्ठा की कद्र सारी दुनिया करती है।
सेन महोदय की सुपुत्री नंदना सेन अभिनय के क्षेत्र में हैं और केतन मेहता की राजा रवि वर्मा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘रंग रसिया’ की नायिका हैं। सेन महोदय ने लंदन फिल्म महोत्सव में फिल्म को पसंद किया और उनका ख्याल है कि यूरोप में फिल्म पसंद की जा सकती है। सेन महोदय को मुंबइया तमाशे की ज्यादा जानकारी नहीं है, परंतु कैथरीन हैपबर्न और जेन फोंडा से उनकी मित्रता रही है। दुनिया के अर्थशास्त्र की गुत्थियों को सुलझाने वाले सेन महोदय अगर मुंबई फिल्म उद्योग के अर्थशास्त्र का मनन करें, तो उन्हें यह रहस्य ही लगेगा। उन्होंने मुगल सम्राट अकबर के वित्त मंत्री राजा टोडरमल की नीतियों का अध्ययन किया है, परंतु मुंबइया फिल्म का बजट उन्हें ‘अरेबियन नाइट्स’ की तरह फंतासी लगेगा।
कल्पना कीजिए कि सेन महोदय हमारी मसाला फिल्म देख रहे हैं। तर्क और विश्लेषण जिस व्यक्ति का जीवन है, उसे तर्कहीन फंतासी देखकर बेतहाशा हंसी आ सकती है और इसे भी सेवा ही मानना चाहिए। यह भी एक भ्रम ही है कि गंभीर चिंतन वाले लोगों के पास हास्य का माद्दा नहीं होता। जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, चाल्र्स डिकेंस, महात्मा गांधी इत्यादि के पास हंसने-हंसाने का माद्दा रहा है।
सेन महोदय ने अपनी सुपुत्री की अभिनय करने की इच्छा का स्वागत किया है अर्थात उन्हें मनोरंजन उद्योग नापसंद नहीं है, परंतु उद्योग से दूरी बने रहने के कारण भी यह प्रेम बना रहा है। यह भी ठीक है कि सेन महोदय ने टेलीविजन पर प्रस्तुत सीरियल नहीं देखे, वरना उनके आलीशान मस्तिष्क को स्थायी ठेस पहुंच जाती।