इंटीरियर डिजाइनर्स का काम व्यक्ति विशेष की पसंद और शख्सियत के अनुरूप रिहायशी या कॅमर्शियल स्पेस तैयार करना है, जो सुंदर लगे और व्यावहारिक भी हो।
कार्य का स्वरूप
इंटीरियर डिजाइनिंग को अक्सर साज-सज्जा से जोड़कर देखा जाता है, जिसमें शामिल है स्टाइल, रंग-रोगन, फर्नीचर, आर्ट वर्क और लाइटिंग का उचित चयन करना। आज के डिजाइनर पुरानी या नई इमारत को काफी फेरबदल के बाद नया स्वरूप देते हैं। आज के डिजाइनर आर्किटेक्चर की गहन जानकारी, ले आउट बनाना, किसी इमारत के नवीनीकरण, खिड़की-दरवाजों की सही जगह व आकार की भी राय देते हैं। यह लोग सही डिजाइन, सुरक्षा, आराम, पर्यावरण के मानकों को ध्यान में रखते हुए इंटीरियर डिजाइन करते हैं। अगर किसी प्रोजेक्ट में ढांचागत काम की भी जरूरत पड़ती है तो यह लोग आर्किटेक्ट या इंजीनियर के साथ मिलकर कार्य करते हैं।
इंटेरेक्टिव है काम
डिजाइनर का काम सिर्फ एक आलीशान दफ्तर में बैठकर प्लान करने का ही नहीं होता। जब काम शुरू होता है तो डिजाइनर समय-समय पर साइट पर जाकर इसे सुपरवाइज करते हैं। इन्हें कई तरह के काम करने वाले ठेकेदारों से तारतम्य बैठाना होता है, जिसमें फर्नीचर, प्लंबर, एसी या इलेक्ट्रिकल सर्किट, फ्लोरिंग, फिटिंग, आर्टवर्क और लाइटिंग प्रमुख क्षेत्र हैं।
जरूरत के मुताबिक
डिजाइनर का काम आसान नहीं है, क्योंकि किसी कॅमर्शियल या रिहायशी इमारत को पूरी तरह आकार लेने में 7-8 माह का समय लगता है। डिजाइनर को चाहिए कि वह अपने ग्राहक की पसंद और जरूरत के मुताबिक प्रोजेक्ट तैयार करे और समयसीमा का भी ध्यान रखे। अब तो कंप्यूटर की सहायता से प्लान का थ्री डी नजारा भी पेश किया जा सकता है। कई सॉफ्टवेयर भी मौजूद हैं जो ग्राहक की ख्वाहिश के मूर्त रूप लेने से पहले इसका एक खाका तैयार कर उन्हें दिखा सकते हैं और पसंद आने पर इसे अमलीजामा पहना सकते हैं।
प्रशिक्षण व कोर्स
एक अच्छा डिजाइनर बनने के लिए सही शिक्षा हासिल करना जरूरी है। बारहवीं में मैथ्स या साइंस की पृष्ठभूमि वाले इंटीरियर डिजायनिंग का कोर्स कर सकते हैं। यह कोर्स करने वालों को कलर्स थ्योरी से लेकर विविध तरह की जानकारी हासिल हो जाती है। सिर्फ तकनीकी जानकारी हासिल करने से ही काम पूरा नहीं होता। अच्छे डिजाइनर वही हैं जो दूसरों के सुझावों को भी सुनें। इनमें अच्छा को-ऑर्डिनेटर बनने और टीम को साथ लेकर काम करने की दक्षता आवश्यक है। इनमें टाइम मैनेजमेंट स्किल भी होनी चािहए। आज कई डिजाइनर किसी एक क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करते हैं, जैसे लाइट डिजाइन, फर्नीचर डिजाइन या तकनीकी क्षेत्र।
पारिश्रमिक
इस क्षेत्र में आपके लिए तेजी से आगे बढ़ने की काफी संभावनाएं हैं। यहां आप एक डिजाइनर से शुरुआत करके दो-तीन वर्षो में ही एसोसिएट डिजाइनर बन सकते हैं। शुरुआत में आपको 8-10 हजार रुपए मासिक वेतन मिल सकता है। हालांकि कुछ वर्षो के अनुभव में ही यह आंकड़ा काफी आगे बढ़ सकता है। एसोसिएट के बाद मुख्य डिजाइनर बनने के बाद एक लाख रुपए प्रतिमाह तक का पैकेज आप पा सकते हैं।