Raipur
बच्चें की भलाई के लिए सब मंजूर
bhaskar news Tuesday, October 27, 2009 02:25 [IST]  

रायपुर. जिस दादी मां की गोद में खेलकूद कर संदीप बड़ा हुआ, वही उनके निधन में चाहकर भी नहीं आ पाया। यह टिस आज भी उसे सालती है। बात हो रही है प्रियदर्शिनी नगर निवासी उदय चिमोटे के बड़े बेटे की, जो इस समय लंदन में एक ख्यातिप्राप्त कंपनी में बड़े पद पर कार्यरत है।



श्री चिमोटे के दूसरे बेटे भी अबुधाबी में रहते हैं और वे भी अपनी दादी के निधन पश्चात किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने अपने बेटों के बारे में कहा कि वे तो आना चाहते थे लेकिन उन्होंने ही मना कर दिया क्योंकि उनके पास महज चार दिन की छुट्टी थी यानी चंद घंटों के लिए रायपुर प्रवास। फिर भी उन्हें तसल्ली है कि बच्चों से हर दो-तीन दिन में बात हो जाती है और वे साल में एक बार स्वयं उनसे मिलने वहां चले जाते हैं, या उन्हें यहां बुला लेते हैं। तात्यापारा निवासी शरद व छाया कमाविसदार का इकलौता बेटा आनंद नौकरी के लिए आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड से लेकर जर्मनी तक गया। अब उन्हें तसल्ली है कि वो नागपुर में आकर बस गया है और वे उससे कभी भी मिल सकते हैं और वो भी उनसे मिलने आते रहता है। फिर भी अलग रहने की पीड़ा मन में रह जाती है।



विख्यात अधिवक्ता किरणमयी नायक के इकलौते सुपुत्र आस्ट्रेलिया में रहते हैं। उनकी याद तो बहुत आती है लेकिन टेलीफोनिक बातचीत से काम चला लेते हैं। उनका बेटा अपने मम्मी-पापा से मिलने यहां आते रहता है, वे भी उनसे मिलने आस्ट्रेलिया जा चुकीं हैं। अनुपम नगर निवासी शरद देखमुख के पुत्र इस समय अमेरिका में हैं औरवे उनकी याद में हमेशा खोए रहते हैं। वरिष्ठ पत्रकार सुहास राजिमवाले के इकलौते सुपुत्र सचिन ने कुछ समय तक चंडीगढ़ में जॉब किया और वह इस समय अमेरिका में बस गया है। श्री राजिमवाले के मुताबिक यहां तो हम अपने समाज-रिश्तेदारों के बीच रहते हैं इसलिए हमारी चिंता की जरूरत नहीं है और उधर सचिन भी अच्छी तरह सेटल हो गया है और यही हमारे लिए सुकून की बात है।



बातें केवल जॉब की ही नहीं, बल्कि अपने ड्रीम कोर्स को करने के लिए अनेक बच्चे बाहर बड़े शहरों में गए हैं। वहीं उनके अभिभावक उनकी राह तकते दिखते हैं। इनमें ज्यादातर अभिभावकों को मालूम है कि उनके बच्चे पढ़ाई खत्म होते ही, वहां बस जाएंगे और आखिरकार उन्हें यहां अकेले ही रहना पड़ेगा। देवेंद्रनगर स्थित कला व वाणिज्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्य संध्या वर्मा व अनिल वर्मा के दो बेटे पुणो में आईआईटी और एमबीए का कोर्स कर रहे हैं। वे कहती हैं कि बच्चों को अकेले रहने के हिसाब से प्रशिक्षित किया गया है।



अब बच्चे खुद ही घर में खाना बना लेते हैं और जहां भी रहेंगे अच्छी तरह रहेंगे। फिर भी घर में बच्चों की कमी तो खलती ही है। गीतांजलिनगर निवासी कॉलोनाइजर प्रकाश-प्रीति दावड़ा की इकलौती बेटी उन्नति मुंबई में एमबीए का कोर्स कर रही है। तो पैलोटी कॉलेज के रजिस्ट्रार केएच चौबे व डिग्री कॉलेज की प्रोफेसर शंपा चौबे की बेटी पुणो में प्रोफेशनल कोर्स कर रही हैं।इस्माइल गफूर की बेटी नुसरत अमेरिका के शिकागो यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के बाद एमडी कर रही हैं। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जीएस बाम्बरा और आर बाम्बरा के पुत्र बंगलुरु में प्रोफेशन कोर्स कर रहे हैं।



सभी अभिभावक इस बात को तहे दिल से स्वीकार करते हैं कि रायपुर में अभी भी वो प्रोफेशनल डिग्रियां उपलब्ध नहीं हैं, जिनके आधार पर देश-विदेश की जानी-मानी कंपनियों में आसानी से जॉब मिल जाए। इसलिए बच्चों को बाहर भेजना ही पड़ता है और इसी तरह बेहतरीन उच्च शिक्षा के बाद वैसी नौकरी यहां कहां मिलेगी। तो जाहिर है कि शिक्षा के बाद अच्छी नौकरी के लिए भी उन्हें बाहर महानगरों या विदेशों में ही रहना पड़ेगा। ऐसे में मन को केवल एक ही तसल्ली होती है कि बेटा उच्च शिक्षित है, बड़ी कंपनी के ऊंचे पद पर काम कर रहा है और खुशहाल है।

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