चंडीगढ़. ‘जर्मनी में तो विद्यार्थियों को यूनिवर्सिटी लेवल तक मुफ्त में शिक्षा दी जाती है, पर यहां पर फीस सिस्टम को देख मैं भी हैरत में पड़ गया था।’ यह कहना था जर्मनी से आए विद्यार्थी निल्स सर्कल का। निल्स सहित आठ विद्यार्थी जर्मनी से और दो विद्यार्थी ताइवान से यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत आए हैं।
ये सभी रोटरी इंटरनेशनल के सहयोग से यहां आए हैं और रोटेरियंस के घरों पर ही ठहरे हैं। जर्मनी के विद्यार्थी एक महीने और ताइवान के विद्यार्थी एक साल तक शहर में रहेंगे। इस दौरान ये शहर में घूमने के अलावा शिक्षण संस्थानों का भी दौरा करेंगे। ताइवान से आई छात्रा हिल्टा और जोसलिन ने भवन विद्यालय सेक्टर 27 में 9वीं में दाखिला लिया है।
इंटरैक्शन की भारी कमी
बेलिंडा ने बताया, ‘जर्मनी में तो क्लास के दौरान शिक्षक और विद्यार्थी के बीच काफी इंटरैक्शन होता है लेकिन शहर के स्कूलोंे का दौरा कर मैंने पाया कि यहां ऐसा नहीं है। शिक्षक बोलता जा रहा है और विद्यार्थी सुनते जा रहे हैं। न कोई सवाल पूछता है और न ही शिक्षक कोई जवाब देता है।
वहां पर स्कूलों में कोई यूनिफॉर्म नहीं है, लेकिन यहां पर यूनिफॉर्म के सिस्टम से मैं काफी प्रभावित हुई। यहां पर क्लासरूम का साइज बड़ा है लेकिन जर्मनी में छोटा है। क्लासरूम छोटे रहें तो क्लास में बेहतर समझ आता है। जर्मनी में स्कूल कम समय के लिए लगते हैं और शनिवार को अवकाश रहता है ताकि विद्यार्थियों पर पढ़ाई का ज्यादा बोझ न पड़े।’
पसंद आए भारतीय व्यंजन
सभी विद्यार्थियों को भारतीय व्यंजन बहुत चटपटे लगे। हिल्टा ने बताया कि चावल, चटनी, चिकन टिक्का उसे बहुत पसंद आया है। निल्स ने बताया, ‘यहां के नूडल्स बेहद भाये और खासकर मसाले का स्वाद तो ऐसा लगा कि हर रोज ऐसा ही खाना खाऊं।’ सिल्वन को दालें व गुलाब जामुन बहुत पसंद आ रहे हैं।