पटियाला. बिजली कट झेल रहे लोगों को भविष्य में भी इनसे निजात मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है। कारण है कि बिजली बोर्ड ने बिजली की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बारे में कोई प्लान तैयार किए बिना बोर्ड राजनीतिक दबाव के चलते धड़ाधड़ नए बिजली कनेक्शन देने की योजना बना ली है।
गर्मियों में भी लोगों को बिजली कट झेलने पड़े सर्दियों में भी बिजली कट लग रहे हैं। लेकिन आने वाली गर्मियों में तो हालात और भी खराब हो जाएंगे क्योंकि बिजली बोर्ड के पास बिजली आपूर्ति बढ़ाने का कोई एजेंडा ही नहीं है। लिहाजा लोगों को लंबे गर्मियों में इस बार से भी ज्यादा लंबे लंबे बिजली कटों का सामना करना पड़ेगा। 31 मार्च 2010 तक जहां राज्य में किसानों को 25 हजार नए ट्यूबेवल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है, वहीं आम लोगों को भी बिजली के साढ़े 5 लाख कनेक्शन देने बाकी हैं।
चल रहे कनेक्शनों को तो बिजली पूरी मिल नहीं रही, अब नए कनेक्शनों को कहां से बिजली लाकर दी जाएगी, इस का जवाब बोर्ड के पास नही है। मतलब साफ है कि जनता 31 मार्च के बाद कभी बिजली के दीदार को तरस सकती है।
मौसम बदलाव ने दिलाई राहत: पिछले कुछ दिनों से मौसम बदलाव ने जरूर बोर्ड को कुछ राहत दिलाई है। इसके बावजूद आज भी बिजली बोर्ड के पास पर्याप्त बिजली नहीं है। आज जहां राज्य में प्रतिदिन 1050 लाख यूनिट बिजली खपत है, वहीं बोर्ड के पास सिर्फ 990 लाख यूनिट बिजली ही मौजूद है। यही कारण है कि आज भी सभी शहरों में 3 से 4 घंटे का बिजली कट लगाया जा रहा है।
हजारों नए कनेक्शन बांटने का लक्ष्य: बोर्ड सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आज राज्य में 25 हजार ऐसे किसान ट्यूबवेल कनेक्शन का इंतजार कर रहे है, जो बोर्ड के दिशा निर्देशों के मुताबिक पिछले कई सालों से अपने सभी साजो समान तैयार कर बैठे है। हालांकि कुछ दिनों पहले बोर्ड में इनमें से 15 हजार नए ट्यूबवेल कनेक्शनों की टैस्ट रिपोर्ट पास (मंजूरी) दे दी है।
भारी राजनीतिक दबाव के चलते 31 मार्च 2010 तक सभी 25 हजार ट्यूबवेल कनेक्शनों को मंजूरी देने का टारगेट भी तय कर कर लिया है। यहीं हद नहीं बोर्ड ने 4.05 लाख बिजली कनेक्शन देहाती घरों को देने का लक्ष्य रखा है, वहीं 1.49 लाख सिंगल प्वाइंट कनेक्शन (मुफ्त) बीपीएल घरों को देने का टारगेट तय है।
बिजली बोर्ड के चेयरमैन एचएस बराड़ का कहना है कि हमने जो नए बिजली कनेक्शन देने का टारगेट रखा है, वो उन लोगों के लिए है जिनके पास आज तक बिजली कनेक्शन हंै ही नहीं। अब इससे इंकार तो नहीं किया जा सकता है कि उन्हें भी बिजली की जरूरत है और उन्हें भी बिजली देना हमारा फर्ज है।
जहां तक उत्पादन क्षमता बढ़ाने का सवाल है तो हम इसके प्रति पूरी तरह गंभीर हैं। इस संबंध में विचार विमर्श चल रहा है, कोई ना कोई रास्ता निकाल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह सही है कि राज्य बिजली संकट का सामना कर रहा है मगर हालात ज्यादा बुरे नहीं हैं।