बेंगलुरु में काफी कुत्ते हैं। न सिर्फ आवारा बल्कि इस हाइटेक सिटी के तमाम उपनगरीय इलाकों में लिमोजिन में घूमने वाले पालतू कुत्ते भी। यदि आप यहां के लालबाग या कब्बन पार्क जैसे इलाकों में जाएं तो आपको सुबह की सैर पर आने वाले हर तीसरे व्यक्ति के साथ यह चौपाया जानवर नजर आएगा।
लेकिन इन कुत्तों के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि इन्हें बहुत दुलारा जाता है और ये अनुशासित नहीं होते। सैर के दौरान जब कुत्ते अपने मालिक का कहना नहीं मानते तो वे उन्हें सुधारने का जतन नहीं करते। वास्तव में वे घर जाकर यह शिकायत करते हैं कि आज कुत्ते का व्यवहार ठीक नहीं रहा।
प्रशिक्षकों का कहना है कि यदि कुत्ते को अपने गलत बर्ताव के बारे में 20 सेकंड के भीतर न बताया जाए, तो उसे लगता है कि उसने जो किया, वह सही है। इसके बाद वे इसे नहीं समझ सकते और उनकी गलती को सुधारना असंभव हो जाता है। इसके अलावा कुत्तों को लंबे-लंबे शब्द या वाक्य भी समझ में नहीं आते। वे उन्हीं शब्दों को समझते हैं, जो छोटे हों। यही कारण है कि वे ‘सिट’, ‘शेक हैंड’ जैसे शब्दों को जल्दी समझ लेते हैं।
इस समस्या के पीछे निहित कारोबारी विचार को समझते हुए एक चतुर उद्यमी ने बेंगलुरु के जेपी नगर में खास कुत्तों के लिए एक डिसिप्लिन डिप्लोमा स्कूल खोलने का फैसला किया। इसमें कुत्तों की एक तीस मिनट की क्लास होगी और इसके बाद उनके मालिकों की भी आधे घंटे की क्लास होगी। वीकेंड की पांच क्लासेस के बाद पपी को डिप्लोमा सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इन क्लासेस के दौरान सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों को स्पेशल मेडल से भी नवाजा जाएगा। इस कोर्स के लिए पपी की न्यूनतम आयु 10 हफ्ते है। ये क्लासेस पुलिस डॉग ट्रेनर्स द्वारा चलाई जाने वाली क्लासेस से अलग होंगी। जहां वे सख्ती से सिखाने की तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, वहीं यह स्कूल पुरस्कार व प्रशिक्षण की तकनीक अपनाएगा।
अब आप अपने कुत्ते का डिप्लोमा सर्टिफिकेट फ्रेम करवाकर अपनी डिग्रियों के साथ अपने मुख्य हॉल में लगा सकते हैं। इसके अलावा आप अपने पड़ोसियों से कह सकते हैं कि आप अपने कुत्ते को ऑफिस जाने से पहले स्कूल छोड़ते हैं। कल्पना करें कि वह क्या दिन होगा!