विदेश में शिक्षा के क्रम में फ्रांस भारतीय छात्रों की नई पसंद बनता जा रहा है। पिछले वर्ष यहां करीब साढ़े नौ सौ छात्रों ने शिक्षा के लिए आवेदन किया, वहीं इस वर्ष यह आंकड़ा 1700 पार कर चुका है। हालांकि इसके लिए तकरीबन 150 स्कॉलरशिप्स का भी काफी योगदान रहा। फ्रांसीसी दूतावास के प्रेस काउंसलर ऐलेन पेरियर के मुताबिक, ‘पिछले वर्ष राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी ने भारत यात्रा पर उम्मीद जताई थी कि 2012 तक यह आंकड़ा 4 हजार छात्रों तक पहुंच सकता है। उनकी उम्मीद के फलीभूत होने के आसार नजर आने लगे हैं।’
मौजूदा कोर्स. इंडो-फ्रेंच कंसोर्टियम ऑफ यूनिवर्सिटीज (आईएफसीयू) ने 2008 से डुअल मास्टर्स डिग्री या ज्वॉइंट पीएचडी रिसर्च प्रोजेक्ट्स की शुरुआत की। इसमें न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी, नैनोटेक्नोलॉजी और सिंथेटिक केमिस्ट्री जैसे कोर्स ऑफर किए जा रहे हैं। इसके लिए फ्रांसीसी और भारतीय कंपनियां मिलकर स्कॉलरशिप को फाइनेंस करती हैं।
फ्रेंच सीखें. फ्रांस जाने से पहले अगर आप फ्रंेच सीख लें तो बेहतर है, क्योंकि आपका कोर्स भले ही अंग्रेजी में हो, लेकिन व्यक्तिगत और पेशेवर स्तर पर फ्रेंच की जानकारी फायदा ही पहुंचाएगी। यूं तो फ्रांस का कला से ज्यादा जुड़ाव है, लेकिन यह मैनेजमेंट और विज्ञान के अध्ययन के लिए प्रमुखता से उभर रहा है। इसके अलावा कलात्मक विषय जैसे आर्किटेक्चर, डिजाइन, सिनेमा और एनिमेशन से जुड़े कोर्स भी छात्रों को बहुत आकर्षित करते हैं।
ऑनलाइन आवेदन. ऑनलाइन आवेदन के विकल्प से छात्रों को काफी फायदा हो रहा है। इससे वह एक बार में ही उच्च शिक्षा से जुड़े तकरीबन 20 संस्थानों में दाखिले के लिए आवेदन कर सकते हैं। वर्ष 2007 से शुरू हुए इस सिलसिले में छात्रों को कागजात फ्रांस नहीं भेजने पड़ते। इसके बजाय भारत में कैंपस फ्रांस के ऑफिस की वेबसाइट www.campusfrance.org पर लॉन इन कर आवेदन कर सकते हैं। यहीं आपकी ई-फाइल और दूसरे कागजात का वेरिफिकेशन होता है।