Raipur
नक्सली के नाम कैदी को चिट्ठी
भास्कर न्यूज Wednesday, October 28, 2009 06:03 [IST]  

रायपुर. राजद्रोह के आरोप में फंसे प्रफुल्ल झा ने मंगलवार को न्यायालय में पेशी के दौरान पुलिस पर नया आरोप मढ़कर सनसनी फैला दी। आरोपी ने एक चिट्ठी का जिक्र करते हुए न्यायाधीश से कहा कि पुलिस ने नक्सलियों से सांठगांठ साबित करने का नया खेल शुरु कर दिया है। मंगलवार को राजद्रोह के केस की फोर्टीन्थ एडीजे सुषमा सावंत की अदालत में पेशी थी।



सुनवाई के दौरान आरोपी झा ने जज को बताया कि जेल में उसके नाम पर एक चिट्ठी पहुंची है। पत्र का मजमून इस तरह है- मदनवाड़ा केस के बाद हालात बिगड़ गए हैं, आप चिंता न करें। आपके वकील को फीस दे दी गई है। पत्र लिखने वाले का नाम आर. राव है। झा ने पुलिस पर चिट्ठी भेजने का आरोप लगाया। उसने कहा कि जेल में चिट्ठी भेजकर पुलिस नक्सलियों से सांठगांठ साबित करने की यह नई साजिश है।



झा के वकील अमीन खान को यह बात पता चलने पर वह भी हैरत में पड़ गए। पत्र में अपना जिक्र सुनते ही उन्होंने उसी समय जज से यह केस छोड़ने की अनुमति मांगी। वकील ने जज के सामने शंका जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह से पुलिस मुझे भी नक्सलियों का साथी प्रमाणित कर सकती है। मैं अपनी प्रतिष्ठा और वकालत दांव पर लगाकर यह केस नहीं लड़ना चाहता।



उन्होंने जज से लिखित आवेदन कर चिट्ठी प्रकरण की न्यायिक जांच करवाने की मांग की। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले नक्सली आरोपों के घिरे बंदियों की पैरवी कर रहे एक अन्य वकील ने भी पुलिस पर साजिश में फंसाने का आरोप लगाकर खुद को केस से अलग कर लिया था।



न्यायालय में मंगलवार को राजद्रोह के केस में दो गवाहों की पेशी थी जिसकी सुनवाई के दौरान चिट्ठी का मामला सामने आया। यहां बताना लाजमी है कि जेल में कैद बंदियों खासतौर पर नक्सली आरोपों के घिरे लोगों की चिट्ठियां पढ़ने के बाद ही उन्हें सौंपी जाती है।

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