इंदौर. शहर में करीब छह से सात लाख लीटर मांग और सप्लाई रोजाना है। जानकारों का कहना है शहर के 60 किलोमीटर दायरे में मौजूद गांवों से आने वाला दूध छह लाख लीटर तक ही होता है। ऐसे में यक्ष प्रश्न यह है कि एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति कहां से हो रही है।
इंदौर दूध उत्पादक संघ के अध्यक्ष राकेश शुक्ला का कहना है शहर में रोजाना करीब सात लाख लीटर दूध की खपत है लेकिन उत्पादन करीब छह लाख लीटर होता है। यही कारण है कि यहां सिंथेटिक दूध आने की शिकायत है। यह दूध ग्वालियर से आता है जो इसका गढ़ है।
वहीं, सांची दुग्ध संघ के जनरल मैनेजर (मार्केटिंग) के.के. माहेश्वरी का कहना है छह से सात लाख लीटर दूध की मांग और सप्लाई है। इसमें से सांची का हिस्सा करीब एक लाख 10 हजार लीटर है। मांग और पूर्ति में एक से डेढ़ लाख लीटर का अंतर है। यह अंतर पानी मिलाकर पूरा किया जाता है।
सिंथेटिक दूध से जुड़े उत्पाद जैसे पनीर, घी और मावा आदि सबसे ज्यादा भिंड, मुरैना, ग्वालियर, यूपी और राजस्थान से आ रहे हैं। म.प्र. दुग्ध व्यवसायी संघ इंदौर के महामंत्री ईश्वर जोशी के मुताबिक वर्तमान में दूध व इससे संबंधित सभी वस्तुओं में भारी मंदी है। पर्याप्त बारिश और पशु आहार की सुगम उपलब्धता से दूध का बंपर उत्पादन हो रहा है।
इंदौर में सिंथेटिक दूध नहीं- प्रशासन
शहर में सिंथेटिक दूध नहीं बिकता है। पिछले दो-तीन महीने में दूध और इससे बने उत्पादों के कई सैंपल लिए गए लेकिन सिंथेटिक दूध के लक्षण नहीं पाए गए। - सचिन लोंगरिया, फूड इंस्पेक्टर, खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग
तीन महीने में करीब 70 दूध और दूध उत्पादों के सैंपल लिए हैं। पानी की मिलावट तो पाई जाती है लेकिन सिंथेटिक दूध कहीं नहीं मिला। - डॉ. नटवर शारडा, स्वास्थ्य पदाधिकारी, नगर निगम
असली और सिंथेटिक दूध के बीच तुलना
असली दूध
भौतिक परीक्षण
रंग- सफेद, लंबे समय रखने पर भी रंग नहीं बदलता, हथेली पर मला जाए तो इसमें झाग नहीं बनता।
पीएच वैल्यू - 6.8 - 6.6
फैट - 4.5 - 5.0 प्रतिशत
रासायनिक परीक्षण
गरम करने पर भी रंग नहीं बदलता, यूरिया मिली होने पर हलका पीला रंग दिखता है।
सिंथेटिक दूध
भौतिक परीक्षण
रंग - सफेद, कुछ समय बाद हल्के पीले का हो जाता है, हथेली पर मलने पर झाग बनता है।
पीएच वैल्यू - 10 - 11 (अलक्लाइन)
फैट - 4.5 - 5.0 प्रतिशत
रासायनिक परीक्षण
उबलने पर पीले रंग का हो जाता है, यूरिया मिला होने पर काले-पीले रंग का हो जाता है।
निगम द्वारा तय मानक
फैट- 3.5 होना चाहिए
फैट निकालने के बाद सीएलआर- 8.5
कैसे रोका जा सकता है सिंथेटिक दूध
हर दिन सघन चेंकिग से
जनता में जाग्रति लाकर
पैकिंग वाले दूध का चलन बढ़ाकर ताकि मिलावट होने पर संबंधित कंपनी और दुकान मालिक पर कार्रवाई की जा सके। (जैसा इंदौर दुग्घ संघ के महासचिव देवराज पाटीदार ने बताया)
सिंथेटिक दूध को लेकर जिला प्रशासन सतर्क
उपभोक्ताओं को सिंथेटिक दूध देकर ठगा न जाए इसके लिए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। अब वह लगातार दूध के सैंपल लेगा और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी करेगा। इस मामले में कलेक्टर की अध्यक्षता में गुरुवार दोपहर एक बजे कलेक्टोरेट में बैठक भी आयोजित की जा रही है।
राज्य शासन के निर्देशों के बाद जिले में यह कार्रवाई प्रारंभ होने जा रही है। नियंत्रक खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी जिला कलेक्टरों को सिंथेटिक दूध के मामले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। एडीएम नारायण पाटीदार ने ‘भास्कर’ को बताया अभी तक सिंथेटिक दूध का मामला नहीं आया है। यह कार्रवाई आगे भी सभी एसडीएम के माध्यम से जारी रहेगी जिन्हें खाद्य एवं औषधि विभाग तथा जिला खाद्य विभाग के इंस्पेक्टर्स मदद करेंगे।
ये अधिकारी हैं समिति में
कलेक्टर की अध्यक्षता में छह सदस्यीय समिति इस मामले की निगरानी के लिए बनाई गई है। इसमें एसएसपी, निगमायुक्त, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, क्षेत्रीय दुग्ध संघ के महाप्रबंधक तथा पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक शामिल हैं।