मुंबई. शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मंगलवार को स्पष्ट किया कि अगर सत्तारूढ़ कांग्रेस ने गृह, वित्त और ऊर्जा विभागों के आवंटन वाले 1999 के फ ामरूले का पालन नहीं किया तो वह महाराष्ट्र की नई सरकार में शामिल नहीं होगी।
राकांपा के वरिष्ठ नेता अजित पवार ने कहा ‘हम महसूस करते हैं कि दोनों दलों के बीच 1999 में हुए समझौते के तहत विभागों का बंटवारा होना चाहिए। उस समय कांग्रेस के पास वह मंत्रालय थे जो 1995-96 के दौरान भगवा गठबंधन के दौरान शिवसेना के पास थे और राकांपा को वे मंत्रालय मिले जो भाजपा के पास थे।’ उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में राकांपा तथा उसे समर्थन करने वाले निर्दलियों के लिए 21 विभागों की मांग की। उन्होंने कहा, ‘अगर कांग्रेस 1999 के फामरूले पर राजी नहीं होती तो उनकी पार्टी नई सरकार का हिस्सा नहीं होगी।’
मैं जरा भी नाराज नहीं : सभी से राय-मशिवरा करने के बाद ही राकांपा विधायक दल के नेता पद पर छगन भुजबल की नियुक्ति की गई है और एक बार वरिष्ठों ने निर्णय ले लिया, तो उसे मानना ही चाहिए। इन शब्दों के साथ अजित पवार ने खुद के नाराज न होने की बात कही है। उन्होंने मंत्रिपद स्वीकारने का संकेत देते हुए कहा कि पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, मैं उसे स्वीकारूंगा।
छगन भुजबल को राकांपा विधायक दल नेता बनाए जाने के बाद से ही मंगलवार की दोपहर तक ‘नॉट रिचेबल’ हुए राकांपा अध्यक्ष शरद पवार के भतीजे अजित पवार एकाएक मीडिया से मुखातिब हुए और नाराज न होने की सफाई दी। उन्होंने कहा कि कुछ आवश्यक काम की वजह से सोमवार को वे उस प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित नहीं हो सके, जिसमें भुजबल की नियुक्ति की घोषणा की गई।
जिसकी वजह से मीडिया ने मेरे नाराज होने की अफवाह उड़ा दी। अजित पवार ने इसके साथ यह भी कहा कि बिना वजह राकांपा कार्यकर्ताओं में गैरसमझ न फैलाई जाए। मंत्रिपद स्वीकारने के बारे में उन्होंने कहा कि किसे मंत्रिपद देना है और किसे नहीं, यह अधिकार पार्टी को है। मैं मंत्रिपद स्वीकारूंगा कि नहीं, इस पर फिलहाल मैं कुछ भी नहीं कहूंगा। हां, पार्टी जो जिम्मेदारी देगी उसे जरूर पूरा करने की कोशिश करूंगा।