Management Funda
बनें बेहतर सेल्समैन
एन रघुरामन Thursday, October 29, 2009 00:14 [IST]  

मुंबई के एक प्रतिष्ठित और अग्रणी मॉल में मेरे साथ एक अजीब स्थिति पेश आई। वहां के एक शॉप असिस्टेंट से जब मैंने नाइकी जूते दिखाने के लिए कहा, तो उसने मुझसे किसी दूसरी शॉप में जाने का आग्रह किया। उसने यह सोचना एक क्षण भी गवारा नहीं किया कि वस्तुत: मैं चाहता क्या हूं। वह मेरी बात को समझ ही नहीं पाया और उसे अपने मॉल में नाइकी जूतों की रेंज की उपलब्धता के बारे में पता नहीं था।



महानगरों में मॉल कल्चर लोगों की खरीददारी प्रवृत्ति में आमूलचूल बदलाव लेकर आया है, लेकिन इसके साथ ही जुझारू और गहन जानकारी रखने वाले सेल्समैन गायब होते जा रहे हैं। इनके स्थान पर शॉप असिस्टेंट की ऐसी पीढ़ी सामने आ रही है, जो मॉल के इलेक्ट्रॉनिक सेक्शन में टीवी देखने में मशगूल रहती है बजाय उन गृहिणियों को अपने यहां सजे रसोई से जुड़े सामान या उपकरण दिखाने के, जो यहां खरीददारी के इरादे से आई होती हैं।



विडंबना है कि औसतन मॉल के समग्र क्षेत्रफल के महज 18 फीसदी स्थान पर ही सही अर्थो में अच्छे कुशल शॉप असिस्टेंट तैनात किए जा पा रहे हैं। अधिकांश शहरों के एचआर कंसल्टेंट्स का कहना है, ‘अच्छे शॉप असिस्टेंट्स की बढ़ती मांग हम पूरी करने में असमर्थ हैं।’ देश में रिटेल क्षेत्र में आई क्रांति के दौरान रिटेलर्स अपने यहां काउंटर्स के पीछे खड़े होने वाले लोगों को लेकर खासे सतर्क थे और उनमें कुछ मूलभूत गुणों की दरकार रखते थे।



इसमें न्यूनतम पात्रता अंग्रेजी में अच्छी पकड़ के साथ स्नातक होना था। लेकिन अब बारहवीं कक्षा पास युवा भी इसके योग्य माने जाते हैं। दुकानों के बढ़ते आकार के साथ एक ही छत के नीचे उपलब्ध ब्रांडों की विस्तृत श्रंखला ने यह बदलाव लाने का काम किया है। किसी मॉल का शॉप असिस्टेंट प्रतिमाह 5,000 रुपए कमाता है और इतना कमाने वाला बारहवीं पास शॉप असिस्टेंट उसी मॉल में दो माह से अधिक नहीं रहता।



अगर आप अपने शहर के किसी मॉल में माह में एक बार ही जाते हैं, तो इस बात की संभावना ज्यादा नहीं है कि आपको पिछली बार मिलने वाला शॉप असिस्टेंट दोबारा मिलेगा। प्रश्न उठता है कि आखिर वे जाते कहां हैं? उन्हें किसी दूसरे मॉल में नई नौकरी मिल जाती है, जहां उन्हें पांच सौ रुपए अधिक वेतन मिल रहा होता है। जाहिर सी बात है कि दस प्रतिशत की वृद्धि इसके लिए जिम्मेदार है।



शॉप असिस्टेंट के क्रम में मांग और आपूर्ति के इस भारी अंतर के बावजूद कुछ अच्छे या हीरा करार दिए जाने वाले लोग भी मिल जाते हैं। लेकिन कम पाई जाने वाली इस नस्ल के लोगों को रिटेलर्स छोटे शहरों की तुलना में बड़े महानगरों में स्थित मॉल में रखना पसंद करते हैं।



रिटेल बाजार का यह वह क्षेत्र है, जहां योग्य और दक्ष व्यक्ति प्रतिमाह 25,000 से 30,000 रुपए तक कमा सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि यह कमाई वही सेल्समैन कर सकता है, जिसे मॉल में उपलब्ध विभिन्न उत्पादों की श्रंखला की पूरी जानकारी हो। न सिर्फ अपने मॉल की, बल्कि अपने प्रतिस्पर्धी मॉल और उत्पादों की भी अच्छी जानकारी हो। अपने और दूसरे के उत्पादों की तुलना से ही वह ग्राहकों को अपने से जोड़े रखने में सफल रहता है।

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