Raipur
हड़ताल से कामकाज ठप
भास्कर न्यूज Thursday, October 29, 2009 01:58 [IST]  

रायपुर. इंदिरागांधी कृषि विश्वविद्यालय कर्मचारी कल्याण संघ की बेमुद्दत हड़ताल छठवे दिन भी जारी रही। हड़ताल में कृषि महाविद्यालय, अनुसंधान केंद्रों और कृषि विज्ञान केंद्रों के तृतीय और चतुर्थ वर्ग के सभी कर्मचारी शामिल हैं। इस आंदोलन से से प्रशासनिक भवन, परीक्षा विभाग, सांख्यिकी, लेखा नियंत्रक कार्यालय, मृदा सेक्सन, एग्रोनामी, उद्यानिकी, वानिकी समेत सभी 18 विभागों में कामकाज ठप हो गया है।



हड़ताली कर्मचारी छठा वेतनमान, समय वेतनमान, मेडिकल भत्ता और पदोन्नति की मांग कर रहे हैं। बिलासपुर, जगदलपुर, अंबिकापुर, कवर्धा स्थित कृषि महाविद्यालय, मुंगेली के कृषि अभियांत्रिकी और तकनीकी महाविद्यालय, सरकंडा-बिलासपुर फार्म, भाटापारा फार्म, बरौंडा फार्म, बोईरदादर फार्म और सभी जिलों के कृषि विज्ञान केंद्रों के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। वैशालीनगर उपचुनाव की वजह से दुर्ग जिला में आचार संहिता लागू है।



अंबिकापुर के कृषि वैज्ञानिक डा. अजयकुमार त्रिपाठी के असामयिक निधन हो जाने पर कृषि विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने बुधवार को शोक-सभा आयोजित कर श्रद्धांजलि दी। उनके शोक पर शांतिपूर्वक धरना दिया गया। धरने में संघ के अध्यक्ष रघुनाथसिंह यादव, महासचिव जयलक्ष्मी नायडू, संरक्षक आरके यादव, संयोजक सतीश अग्रवाल, उपाध्यक्ष सुकालूराम धनकर, संगठन सचिव अहसानुल अजीम, प्रचार सचिव यूएम उपाध्याय, कोषाध्यक्ष केके चारी, एमएस बघेल, एसके तिवारी, जीपी यादव, संतूराम साहू आदि शामिल हुए।



संवादहीनता से माहौल बिगड़ा : विश्वविद्यालय प्रशासन और हड़ताली कर्मचारियों के बीच संवादहीनता से माहौल बिगड़ता जा रहा है। कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष रघुनाथसिंह यादव का कहना है कि छठे वेतनमान लागू करने का आदेश जारी कर दिया गया है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन लागू नहीं कर रहा है। उनके वार्ता के लिए कोई पहल नहीं हो रही है। कुलपति और उच्चधिकारियों के नकारात्मक रवैए से कर्मचारियों में
रोष व्याप्त है।



उधर, कुलपति के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी डा. एके त्रिपाठी का कहना है कि कर्मचारियों के छठे वेतनमान की स्वीकृति की फाइल छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग को 7 जुलाई को भेज दी गई है। वित्त विभाग के आदेश के बाद ही छठा वेतनमान दिया जा सकेगा। कर्मचारियों को हड़ताल नहीं करनी चाहिए। उन्हें कुलसचिव से वार्ता करनी चाहिए।

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