शहर में ऐसे कुछ भवन नहीं, बल्कि दर्जनों ऐसे अपार्टमेंट और कमर्शियल बिल्डिंग हैं, जहां की लिफ्ट से लोग परेशान हैं। अधिकतर अपार्टमेंट सोसाइटी के अंतर्गत आते हैं इसलिए वहां रहने वाले सोसाइटी के पदाधिकारियों से शिकायत भी करते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं। मेंटनेस के नाम पर हर महीने भारी फीस ली जाती है, लेकिन जब लिफ्ट बनाने की पारी आती है, तो सर्विसिंग का बहाना बना दिया जाता है।
अपार्टमेंट या कांप्लेक्स में रहना मजबूरी है इसलिए लोग इसका ज्यादा विरोध भी नहीं करते हैं। सिटी भास्कर ने ऐसे ही कई अपार्टमेंट के लोगों से बात की तो उनका कहना है कि महीने में दस दिन लिफ्ट में कुछ न कुछ खराबी आ ही जाती है। परेशानी उस समय और बढ़ जाती है जब बच्चों को सीढ़ियों से रास्ता तय करना पड़ता है।
अपार्टमेंट बनाने के पहले लिफ्ट को लेकर कई सपने दिखाए जाते हैं, जैसे यहां इंटरनेशनल सुविधाओं वाली है। कभी बंद नहीं होती। लाइट चले भी जाए, तो निकटतम फ्लोर में आकर गेट आटोमेटिक खुल जाता है। लगने के बाद मालूम होता है कि लिफ्ट चल गई, तो वो ही बड़ी बात है।
बच्चों और बुजुर्गो को ज्यादा परेशानी : शहर के हर स्थान पर बड़े-बड़े अपार्टमेंट स्थित हैं। लोगों का कहना है कि अधिकतर अपार्टमेंट में लिफ्ट बंद होने की समस्या रहती है। एक अपार्टमेंट में रहने वाले गौरव खन्ना, महेंद्र साहू और दीपक अग्रवाल ने बताया कि लिफ्ट बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गो को हो जाती है। कई जरूरी काम होते हैं इसलिए मजबूरी में सीढ़ियों से सफर करना ही पड़ता है।
कटोरातालाब के एक अपार्टमेंट में रहने वाले कमलेश अग्रवाल, मनीष लांगे और अरुण छाबड़ा ने बताया कि एक बार लिफ्ट बंद होती है, तो तीन दिन से कम समय में शुरू नहीं हो पाती है। यहीं की हाउसवाइफ संध्या द्विवेदी के अनुसार तीसरे माले में उनका घर होने की वजह से उन्हें बेहद परेशानी हो जाती है। फ्लैट लेने के पहले उन्हें बताया गया था कि लिफ्ट की सुविधा बारह महीने-24 घंटे रहेगी, लेकिन हकीकत अब पता चली।