भोपाल. ‘साइंटिस्ट बनना किस बच्चे का सपना नहीं होता, लेकिन उसके लिए जरूरत होती है, कड़ी मेहनत और ढेर सारी पढ़ाई की, जो मैं पूरी लगन के साथ कर रहा हूं।’ यह कहना है बिलाबॉग स्कूल में छठवीं लास में पढ़ने वाले 11 वर्षीय त्रेज्स मारवाहा का। हाल ही में पोगो चैनल द्वारा ‘पोगो अमेजिंग किड्स अवार्ड-2009’ के लिए भोपाल से बतौर प्रतिभागी चुने गए त्रेज्स से भास्कर ने उनके अनुभव जाने।
पसंद हैं खास खिलौने: छोटी उम्र से ही त्रेज्स के खिलौने चुनने का तरीका अलग रहा है। उन्हें ऐसे खिलौने पसंद हैं, जिनमें कोई खास तकनीक का प्रयोग किया गया हो। इससे उन्हें उस खिलौने पर अपनी प्रतिभा आजमाने का मौका मिल जाता है। वे बताते हैं कि उनका सबसे पसंदीदा गेम ‘लीगो एनएक्सटी किट’ है।
यहां किया कला का प्रदर्शन: चूंकि त्रेज्स को रोबोटिक्स पसंद है इसलिए उसने बीआईटी इंजीनियरिंग कॉलेज वेल्लूर से रोबो कोर्स भी किया। त्रेश 2008 में दिल्ली में आयोजित इंडियन रोबोटिक ओलंपियाड में भी जीत हासिल कर चुके हैं।
साथ ही उन्हें वल्र्ड रोबोटिक ओलंपियाड में हिस्सा लेने के लिए जापान भी आमंत्रित किया जा चुका है। इसके अलावा हाल ही में उनका नाम ‘पोगो अमेजिंग किड्स अवार्ड-2009’ के लिए बतौर प्रतिभागी भी चुना गया है, जिसके विजेता का नाम दिसंबर 2009 में घोषित किया जाएगा।
बनाया अनोखा रोबोट
साइंटिस्ट बनने का इच्छुक यह नन्हा छात्र अभी तक किट की मदद से लगभग 200 बार रोबोट तैयार कर चुका है। वे बताते हैं कि किट बनाने वाली कंपनी खिलौने को अलग-अलग टुकड़ों में अपने ग्राहकों को देती है। इन टुकड़ों को अपनी कल्पना शक्ति से कोई भी रूप दिया जा सकता है।
इसी कल्पनाशीलता के आधार पर वे ऐसा रोबोट भी बना चुके हैं, जो हाथ-पैर, सिर और कमर हिलाने ने साथ-साथ देखने, सुनने, स्पर्श करने, नाचने और आदेश का पालन करने में सक्षम होता है। वे कहते हैं जैसी प्रोग्रामिंग की जाएगी, रोबोट वैसे ही संचालित होने लगेगा।