चंडीगढ़. पंजाब यूनिवर्सिटी के भू-गर्भ वैज्ञानिकों ने देश के पहले जियो नेशनल पार्क का प्रोजेक्ट गुजरात सरकार को सौंप दिया है। डायनासोर के जीवाश्म को संजोने की इच्छुक गुजरात सरकार ने इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने का जिम्मा पीयू के जियोलॉजी विभाग को सौंपा था। बुधवार को पीयू के जियोलॉजी डिपार्टमेंट के चेयरमैन प्रो. एडी आहलुवालिया और गवर्नमेंट म्यूजियम चंडीगढ़ के प्रिंसिपल कन्सलटेंट पीसी शर्मा की गुजरात सरकार के प्रतिनिधियों के साथ इस सिलसिले में बैठक हुई।
इस नेशनल पार्क की डिजाइनिंग और आर्किटेक्चर इन विशेषज्ञों की देखरेख में ही तैयार होगा। गुजरात में नर्मदा घाटी के आसपास डायनोसोर के जीवाश्म मिलते रहे हैं, लेकिन इनका संरक्षण करना हमेशा ही चुनौती रहा है। गुजरात सरकार इन जीवाश्मों के साथ ही भू-गर्भ विज्ञान से जुड़ी दूसरी चीजों के संरक्षण के लिए यह जियो नेशनल पार्क बनाना चाहती है। इस काम के लिए पीयू की मदद ली जा रही है।
पीयू के भू-गर्भ वैज्ञानिक डॉ. आहलुवालिया और पीसी शर्मा ने इस सिलसिले में गुजरात सरकार के महेश्वर साहू पिंरसिपल सेक्रेटरी माइनिंग एंड इंडस्ट्री और कमिश्नर जियोलॉजी एंड माइनिंग को अपनी रिपोर्ट सौंपी। इस प्रोजेक्ट के तहत अहमदाबाद की साइंस सिटी में जियो नेशनल पार्क के अलावा भुज में म्यूजियम और आसापास के गांवों में छोटे जियो पार्क की विस्तृत रिपोर्ट पर चर्चा हुई।
मथारू भी करेंगे मदद
नेशनल पार्क के लिए पीयू ने डायनासोर के मॉडल, वॉल मैग्जीन समेत जियो पार्क की बिल्डिंग स्टोन से बनने वाली दीवारों का डिजाइन तैयार किया है। इसमें दिल्ली के आर्किटेक्ट फर्म की मदद भी ली जाएगी। इस फर्म ने ही चंडीगढ़ में बेअंत सिंह मेमोरियल और कुछ अन्य स्मारकों का आर्किटेक्चर तैयार किया है।
गुजरात सरकार ने इस काम के लिए पीयू के वैज्ञानिकों को अपनी इच्छा से आर्किटेक्ट चुनने की छूट दी है। इनके साथ ही चंडीगढ़ में स्कल्पचर तैयार करने वाले चरणजीत मथारु रेप्लिका और डायनोसोर मॉडल तैयार करने में मदद करेंगे। प्रो. आहलुवालिया और एनपी शर्मा का कहना है कि इस नेशनल पार्क की दीवारें ऑक्सफोर्ड म्यूजियम की तर्ज पर तैयार होंगी।