रायपुर. राज्य के इंजीनियरिंग कालेजों और तकनीकी संस्थानों में छात्रों तीन माह में ही दोबारा फीस के लिए दबाव बनाया जा रहा है। कालेजों में नोटिस टांग दी गईं और छात्रों को धमकाया जा रहा है कि उन्हें परीक्षा में नहीं बैठने दिया जाएगा।
भास्कर से कई पालकों ने नाम न छापने की शर्त पर इस संबंध में शिकायत की। इंजीनियरिंग कालेजों में फीस पर मनमानी रोकने शासन ने कमेटी बनाई है। कमेटी ने दो माह पूर्व अंतरिम फीस तय कर सत्र 2009-10 से एडमिशन लेने वाले छात्रों को बड़ी राहत दी। कालेजों ने पहले सेमेस्टर की फीस तो वसूल ली। दो माह में ही अगले सेमेस्टर की फीस के लिए तकादा शुरू कर दिया। जबकि शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि चालू सेमेस्टर की फीस ही छात्रों से ली जाए।
दो माह में ही फीस के दबाव से पालक परेशान हैं। छात्र भी प्रबंधन के व्यवहार से अपसेट हैं। पालकों का कहना है कि कालजों में मापदंडों के अनुरूप पर्याप्त स्टाफ और सुविधाएं नहीं हैं। प्रबंधकों ने एडमिशन के दौरान बड़े-बड़े वादे किए लेकिन अब वहां बच्चों को पढ़ाना उनकी मजबूरी है। फीस तय करने वाले पांच सदस्यीय समिति ने नए छात्रों को लिए तो रिपोर्ट दे दी, लेकिन पिछले सत्र 2008-09 से एडमिशन ले चुके छात्रों के लिए क्या करना है रिपोर्ट देने में देरी कर रही है।
शासन ने तकनीकी शिक्षा संचालनालय को निर्देश दे रखे हैं कि लगातार कालेजों की पड़ताल करें लेकिन अधिकारी वहां जाकर झांकते तक नहीं। अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि फीस का मामला देखना हमरा काम नहीं। इसके लिए समिति बनी हुई है। ज्ञात हो कि मनमानी फीस वसूली के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला लंबित है।