जयपुर. डिपो में आग के साथ ही कर्मचारी बाहर भागे और मुख्य सड़क की ओर दौड़ने लगे। चंद मिनट बाद एक तेज धमाके के साथ भीषण आग चारों तरफ फैल गई।
धमाका इतना तेज था कि डिपो के चारों तरफ की 50 फैक्ट्रियों और 11 कॉलेजों व हॉस्टल की खिड़कियां व दरवाजे टूट गए और दो किलोमीटर तक सड़क पर कंकरीट व कांच के छोटे छोटे टुकड़ों की चादर बिछ गई। इसके बाद तो मानो भूचाल आ गया। जिसको जिधर जगह मिली भाग खड़ा हुआ। जिसको घटना का पता नहीं भी था वह भागने वालों के पीछे हो लिया।
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करीब 5 से 7 किलोमीटर दूर तक के लोग हक्केबक्के रह गए। धमाके से हिले भवनों के कारण ज्यादातर लोग भूकंप के तेज झटके समझे और सड़कों, मैदानों में आ गए। लोगों के समझ में नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। स्थिति यह थी लोग सड़कों पर इधर-उधर घूमते रहे, वे समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर वे करें क्या।
एक छोटे से बच्चे को लेकर एक दंपत्ती सीतापुरा की ओर जा रहे थे, बोले, कहां जाएं, किधर जाना है। वे आसपास के लोगों से पूछ रहे थे, यहां से निकलें कैसे। जो आसपास थे, वे दूर निकलने के प्रयास में थे, जो दूर थे, वे मौके पर पहुंचना चाह रहे थे कि स्थिति क्या है। गोपालपुरा मोड से लेकर सीतापुरा के आसापास तक हर नुक्कड़ पर, रास्ते के दोनों ओर लोग समूह में खड़े, आसमान की ओर देख रहे थे कि आखिर हुआ क्या है। एक-दूसरे से पूछते रहे कि आग क्यों लगी, कोई मरा तो नहीं।










